वाराणसी में मासूम की हत्या: 11 माह में आरोपी को फांसी की सजा, न्याय की तीव्र गति
वाराणसी के रामनगर क्षेत्र से सामने आए एक दिल दहला देने वाले मामले में न्याय ने अपनी तीव्र गति का परिचय दिया है। एक मासूम बालिका के साथ दुष्कर्म और जघन्य हत्या के आरोपी इरशाद को अदालत ने मात्र 11 महीनों के भीतर फांसी की सजा सुनाई है। यह फैसला न केवल पीड़ित परिवार को कुछ राहत देगा, बल्कि ऐसे अपराधों के खिलाफ समाज में एक कड़ा संदेश भी देगा।
घटना पिछले साल 25 दिसंबर की है, जब रामनगर के एक प्राथमिक विद्यालय के पास एक बोरे में अर्द्धनग्न अवस्था में एक आठ वर्षीय बालिका का शव बरामद हुआ था। इस वीभत्स घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया था और लोगों में भारी आक्रोश था। सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन सक्रिय हो गया था और तत्काल जांच शुरू कर दी गई थी।
पुलिस की जांच में सीसीटीवी फुटेज एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित हुआ। फुटेज के गहन विश्लेषण से पता चला कि इरशाद, जो पीड़ित बच्ची के घर के पास ही रहता था, ने पहले बच्ची की रेकी की। इसके बाद उसने बच्ची का अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म का प्रयास किया। जब वह अपने घिनौने कृत्य में सफल नहीं हो सका, तो उसने बच्ची की बेरहमी से हत्या कर दी। हत्या के बाद, उसने शव को एक बोरे में भरकर स्कूल परिसर में फेंक दिया ताकि सबूत मिटाए जा सकें।
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इरशाद को गिरफ्तार किया और गहन विवेचना के बाद साक्ष्यों के आधार पर अदालत में चार्जशीट दाखिल की। मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए, अदालत ने भी सुनवाई में तेजी लाई। लगभग 11 महीने की सुनवाई और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद, एडीजे पॉक्सो कोर्ट ने आरोपी इरशाद को दोषी पाते हुए फांसी की सजा का निर्णय सुनाया। यह त्वरित न्याय व्यवस्था की सक्रियता का एक उदाहरण है, जो ऐसे जघन्य अपराधों के पीड़ितों के लिए न्याय सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
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