वाराणसी में 100 करोड़ के कोडीनयुक्त कफ सिरप की दुरुपयोग की जांच SIT को सौंपी गई
वाराणसी में सौ करोड़ रुपये की कोडीनयुक्त कफ सिरप के दुरुपयोग की जांच अब विशेष जांच दल (एसआईटी) करेगी। दवा माफियाओं की संलिप्तता की आशंका के चलते यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। पुलिस कमिश्नर के आदेश पर तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य इस बड़े रैकेट की तह तक जाना, इसमें शामिल सभी दोषियों की पहचान करना और उनके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
यह एसआईटी अपर पुलिस उपायुक्त सरवणन टी की अध्यक्षता में गठित की गई है। इस टीम में एसीपी शुभम कुमार सिंह और कोतवाल दयाशंकर सिंह को सदस्य के तौर पर शामिल किया गया है। कफ सिरप के गैर-चिकित्सीय उपयोग के गंभीर आरोपों को देखते हुए, एसआईटी को इस मामले की गहराई से जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। जांच की गंभीरता को देखते हुए, इसे किसी निश्चित समय-सीमा में नहीं बांधा गया है, ताकि हर पहलू की बारीकी से पड़ताल की जा सके।
सूत्रों के अनुसार, इस मामले का मुख्य आरोपी पिता-पुत्र की जोड़ी फिलहाल फरार चल रही है और पुलिस उनकी तलाश में जुटी है, लेकिन अभी तक उनका कोई सुराग नहीं मिल पाया है। यह पूरा मामला कायस्थ टोला, प्रहलाद घाट, वाराणसी निवासी शुभम जायसवाल और उसके पिता भोला प्रसाद से जुड़ा है, जो रांची में मेसर्स शैली ट्रेडर्स के नाम से फर्म चलाते हैं। आरोप है कि पिता-पुत्र की इस संयुक्त फर्म ने ऐबट हेल्थकेयर से लगभग 89 लाख शीशियों का फेन्सीडील कफ सिरप खरीदा, जिसमें से 84 लाख शीशियों को वाराणसी में खपा दिया गया।
औषधि विभाग द्वारा की गई प्रारंभिक जांच में कफ सिरप के गैर-चिकित्सीय उपयोग की बात सामने आई थी। इस जांच के दायरे में वाराणसी की 26 फर्मों के काला कारोबार का खुलासा हुआ। इसके बाद, औषधि विभाग के निरीक्षक जुनाब अली ने 26 फर्मों के कारोबारियों और रांची स्थित फर्म के आरोपित पिता-पुत्र के खिलाफ मामला दर्ज कराया। सूत्रों का कहना है कि आरोपित पुत्र शुभम जायसवाल को गाजियाबाद पुलिस पहले से ही कफ सिरप की तस्करी के मामले में आरोपित बना चुकी है। औषधि विभाग की जांच के दौरान 102 दवा की दुकानें भी संदेह के घेरे में आ गई हैं, जिनकी गहनता से जांच की जा रही है।
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