भारतीय रेलवे की नई पहल: ट्रेनों में मिलेगी संक्रमण-मुक्त हवा, यूवी-सी तकनीक का होगा इस्तेमाल
भारतीय रेलवे यात्रियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रहा है। अब ट्रेनों के डिब्बों में हवा को संक्रमण-मुक्त बनाने के लिए वायरलेस रोबोटिक अल्ट्रावायलेट यूवी-सी कीटाणुशोधन तकनीक का प्रयोग किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य यात्रा के दौरान यात्रियों को हानिकारक कीटाणुओं से बचाना है।nnदिल्ली रेल मंडल में इस तकनीक का सफल परीक्षण किया गया है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। परीक्षणों में यह तकनीक कोच में मौजूद हानिकारक कीटाणुओं को प्रभावी ढंग से खत्म करने में सक्षम पाई गई है। इस सफलता के बाद, रेलवे बोर्ड ने देश भर के सभी रेलवे जोनों को इस तकनीक को अपनाने के निर्देश जारी किए हैं। यह पहल ट्रेनों को अधिक सुरक्षित और स्वच्छ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।nnयह नई वायरलेस रोबोटिक यूवी-सी कीटाणुशोधन तकनीक विशेष रूप से ट्रेन के कोचों की स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए विकसित की गई है। इसमें एक मोबाइल प्लेटफार्म और पराबैंगनी-सी (यूवी-सी) बैटन शामिल है, जो अल्ट्रासोनिक सेंसर की मदद से काम करता है। यह तकनीक सतहों और हवा में मौजूद सूक्ष्मजीवों को निष्क्रिय करती है। यूवी-सी किरणें 254 नैनोमीटर तरंगदैर्ध्य पर बैक्टीरिया और वायरस के डीएनए-आरएनए को नुकसान पहुंचाकर उन्हें निष्क्रिय कर देती हैं, जिससे लक्षित क्षेत्र संक्रमणमुक्त हो जाता है।nnइस तकनीक का एक महत्वपूर्ण लाभ यह है कि यह पर्यावरण के अनुकूल और रसायन-मुक्त है। इसमें पानी या प्लास्टिक की एक बूंद के बिना कीटाणुशोधन किया जाता है, जिससे रसायन-आधारित सफाई से जुड़े पर्यावरणीय बोझ को कम किया जा सकता है। यह शुष्क और रसायन-मुक्त प्रक्रिया किसी भी हानिकारक अवशेष को पीछे नहीं छोड़ती है, जो इसे एक टिकाऊ और हरित समाधान बनाता है।nnरेलवे बोर्ड के पर्यावरण एवं हाउसकीपिंग मैनेजमेंट के निदेशक ने सभी प्रधान मुख्य अभियांत्रिकी अभियंताओं को भेजे एक पत्र में कहा है कि क्षेत्रीय रेलवे को आरडीएसओ (अनुसंधान डिजाइन और मानक संगठन) के साथ परामर्श करके एक वर्ष के लिए कोच कीटाणुशोधन के लिए यूवी-सी प्रौद्योगिकी को अपनाने पर तकनीकी या प्रक्रियात्मक परीक्षण आयोजित करने की संभावना तलाशनी चाहिए।nnविशेषज्ञों का मानना है कि कोच कीटाणुशोधन के लिए यूवी-सी प्रौद्योगिकी को अपनाना एक बहुत अच्छा कदम है। जिस प्रकार आरओ (रिवर्स ऑस्मोसिस) सिस्टम में अल्ट्रावायलेट तकनीक का उपयोग पानी को शुद्ध करने के लिए किया जाता है, उसी प्रकार यह तकनीक हवा में मौजूद सूक्ष्मजीवों को निष्क्रिय करके संक्रमण की संभावना को कम करेगी। यह पहल यात्रियों को एक सुरक्षित और स्वास्थ्यवर्धक यात्रा अनुभव प्रदान करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।”
पत्थर साबित होगी।
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