मार्गशीर्ष सोम प्रदोष व्रत 2025: वैवाहिक जीवन में खुशहाली के लिए ऐसे करें माता पार्वती की पूजा
हिंदू धर्म में मार्गशीर्ष माह का विशेष महत्व है और इस दौरान पड़ने वाला सोम प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। सोमवार का दिन स्वयं भगवान शिव और आदिशक्ति पार्वती को समर्पित होता है, ऐसे में जब इस विशेष दिन पर प्रदोष व्रत का संयोग बनता है, तो इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। यह व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने से भक्तों को विशेष कृपा प्राप्त होती है।nnमान्यता है कि इस खास दिन (Pradosh Vrat 2025 November) माता पार्वती की विधिवत पूजा करने से वैवाहिक जीवन में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और पति-पत्नी के बीच प्रेम एवं सामंजस्य बढ़ता है। जिन दंपतियों के बीच अनबन या मनमुटाव चल रहा है, उनके लिए यह व्रत विशेष रूप से लाभकारी सिद्ध हो सकता है।nnप्रदोष व्रत के दिन शाम के समय स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके पश्चात, भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या चित्र के समक्ष आसन ग्रहण करें। देवी पार्वती को विशेष रूप से श्रृंगार की सामग्री जैसे चूड़ी, बिंदी, सिंदूर, मेहंदी आदि अर्पित करें। इसके साथ ही, पुष्प, फल और मिष्ठान्न का भोग लगाएं। भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा और भांग अत्यंत प्रिय हैं, इन्हें भी अर्पित करें।nnपूजा के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें। इसके बाद, देवी पार्वती की कृपा प्राप्त करने के लिए पार्वती चालीसा का पाठ करें। ऐसा माना जाता है कि पार्वती चालीसा का पाठ करने से देवी प्रसन्न होती हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। पूजा के अंत में, कपूर जलाकर भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें। इस आरती में ‘जय गिरी तनये दक्षजे, शम्भु प्रिये गुणखानि। गणपति जननी पार्वती, अम्बे! शक्ति! भवानि॥’ जैसे मंत्रों का उच्चारण करना विशेष फलदायी होता है।nnइस प्रकार की गई पूजा से न केवल वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि आती है, बल्कि घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होता है। यह व्रत भक्तों को भौतिक और आध्यात्मिक दोनों स्तरों पर लाभ प्रदान करता है, जिससे जीवन में सुख, सौभाग्य और शांति की वृद्धि होती है।”
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