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ओवैसी का बिहार मिशन: सीमांचल में AIMIM का बढ़ता ग्राफ, जोकीहाट के बाद नई जमीन तैयार

By Nov 17, 2025

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) बिहार के सीमांचल क्षेत्र में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। अररिया जिले की राजनीतिक सरजमीं पर पार्टी का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है, खासकर जोकीहाट विधानसभा सीट पर लगातार दूसरी बार जीत दर्ज करने के बाद। पार्टी अब अररिया में भी अपनी पैठ मजबूत कर रही है, जिसमें युवाओं की भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय बताई जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, पार्टी प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी का मुख्य ध्यान इन क्षेत्रों पर केंद्रित रहा है। हालिया विधानसभा चुनावों में, अररिया सीट पर AIMIM को कुल मतदान का 22.07 प्रतिशत यानी 53,421 मत प्राप्त हुए, जबकि जोकीहाट में पार्टी ने 38.52 प्रतिशत यानी 83,737 मतों के साथ शानदार जीत हासिल की। यह वृद्धि पार्टी के बढ़ते जनाधार का स्पष्ट संकेत है।

इन आंकड़ों को देखते हुए, यह संभावना जताई जा रही है कि निकट भविष्य में AIMIM न केवल विधानसभा चुनावों में, बल्कि संसदीय चुनावों में भी अन्य प्रमुख दलों को कड़ी टक्कर दे सकती है। मुस्लिम मतदाताओं के बीच पार्टी की गहरी पैठ और असदुद्दीन ओवैसी का व्यक्तिगत प्रभाव, महागठबंधन के पारंपरिक ‘MY’ समीकरण में सेंध लगाने में मददगार साबित हो रहा है, जिससे पार्टी अपना बड़ा जनाधार तैयार कर रही है।

इस विधानसभा चुनाव में, AIMIM ने जिले की दो सीटों – जोकीहाट और अररिया – पर अपने प्रत्याशी उतारे थे। जोकीहाट में, मुर्शिद आलम ने जदयू प्रत्याशी को हराकर जीत हासिल की, जबकि अररिया में पार्टी तीसरे स्थान पर रही। अररिया में कांग्रेस के आबिदुर्र रहमान विजयी हुए, जबकि जदयू की शगुफ्ता अजीम दूसरे स्थान पर रहीं। AIMIM प्रत्याशी मो. मंजूर आलम को 22.07 प्रतिशत मत मिले।

पिछले विधानसभा चुनावों की तुलना में, जोकीहाट और अररिया दोनों सीटों पर AIMIM के जनाधार में बढ़ोतरी देखी गई है, जिसके परिणामस्वरूप चुनाव में पार्टी का वोट शेयर भी बढ़ा है। सीमांचल के तीन जिलों – अररिया, किशनगंज और पूर्णिया – को मिलाकर AIMIM ने इस बार पांच सीटों पर जीत हासिल की है। यह प्रदर्शन दर्शाता है कि पार्टी बिहार के राजनीतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण शक्ति के रूप में उभर रही है।

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