मुंगेर रेल कारखाना रचेगा इतिहास, नए साल से 800 वैगनों की होगी मरम्मत
मुंगेर का जमालपुर रेल कारखाना इतिहास रचने की कगार पर है। नव वर्ष से यह कारखाना प्रतिमाह 800 मालगाड़ियों के वैगनों की मरम्मत का कार्य संभालेगा, जो इसे देश का पहला ऐसा रेल कारखाना बनाएगा। वर्तमान में, जमालपुर रेल कारखाना प्रतिमाह लगभग 620 से 640 वैगनों की मरम्मत करता है। इस क्षमता को बढ़ाने के लिए रेलवे ने पहले चरण में 80 करोड़ रुपये का आवंटन किया है, जिससे कारखाने में शाप (Workshop) की संख्या बढ़ाई जाएगी और आधुनिक तकनीकों को अपनाया जाएगा।
देश भर में कुल 19 वर्कशॉप वैगन मरम्मत का कार्य करते हैं, जिनमें लिलुआ, मिदनापुर, खड़गपुर, जमालपुर, झांसी, राजस्थान, चेन्नई और कोटा जैसे प्रमुख स्थान शामिल हैं। इन सभी वर्कशॉप में वर्तमान में प्रति माह 650 से 715 वैगनों की मरम्मत होती है। पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क पदाधिकारी (सीपीआरओ) के अनुसार, झांसी वर्कशॉप फिलहाल 715 वैगनों की मासिक मरम्मत के साथ देश में पहले स्थान पर है। जमालपुर कारखाने का लक्ष्य इस रिकॉर्ड को तोड़ना है। आवंटन के साथ ही संसाधन बढ़ाने का काम शुरू कर दिया गया है और उम्मीद है कि जल्द ही नई क्षमता के साथ कार्य प्रारंभ हो जाएगा।
जमालपुर रेल कारखाना, जो एशिया का पहला रेल इंजन कारखाना होने का गौरव रखता है, अपनी कुशल कारीगरी के लिए हमेशा से जाना जाता रहा है। हाल ही में, यहाँ के तकनीशियनों की टीम ने देश का अत्याधुनिक बीटीपीएन टैंक वैगन एम-1 बनाकर अपनी हुनरमंदी का लोहा मनवाया था। इस वैगन की एक साथ 49 यूनिट का निर्माण कर सितंबर माह में इन्हें रवाना किया गया था। यह कारखाना भारतीय रेल की रीढ़ माना जाता है, जहाँ 140 टन भार उठाने में सक्षम हाइड्रोलिक क्रेन का निर्माण होता है, जो 90 डिग्री तक काम कर सकती है।
इस कारखाने में निर्मित क्रेन और जैक का उपयोग रेल दुर्घटनाओं के दौरान बेपटरी हुई बोगियों को पटरी पर लाने, रेलवे ब्रिज निर्माण और कंटेनर उतारने-चढ़ाने जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में किया जाता है। रेल हादसों के बाद बचाव कार्यों में इस्तेमाल होने वाले जैक भी यहीं बनाए जाते हैं। इसके अतिरिक्त, यहाँ ओपन ट्रांसपोर्ट बैगन का भी निर्माण होता है। वैगन मरम्मत क्षमता में वृद्धि से न केवल भारतीय रेल की परिचालन क्षमता बढ़ेगी, बल्कि यह मुंगेर क्षेत्र के लिए रोजगार के नए अवसर भी खोलेगी।
