आईआईटी मद्रास का क्रांतिकारी शोध: AI से होगी परीक्षा तनावग्रस्त छात्रों की आसान पहचान
भारत में बड़ी संख्या में छात्र परीक्षा के भय और तनाव से जूझते हैं, जिसका असर उनके शैक्षिक प्रदर्शन और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। अक्सर वे अपनी कठिनाई बता नहीं पाते, जिससे उनकी समस्या और बढ़ जाती है। इसी गंभीर समस्या को संबोधित करने के लिए, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास के शोधकर्ताओं ने एक क्रांतिकारी शोध किया है। इस अध्ययन में ऐसे शारीरिक संकेतकों की पहचान की गई है, जिनसे यह पता लगाना आसान होगा कि कौन से छात्र परीक्षा के दौरान अत्यधिक चिंता और तनाव के जोखिम में हैं।
‘बिहैवियरल ब्रेन रिसर्च’ जर्नल में प्रकाशित इस शोध में दो प्रमुख शारीरिक संकेतकों को महत्वपूर्ण माना गया है: फ्रंटल अल्फा एसिमिट्री (FAA), जो भावनात्मक नियमन का मस्तिष्क-आधारित संकेतक है, और हार्ट रेट वैरिएबिलिटी (HRV), जो हृदय के अनुकूलन नियंत्रण को मापता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि जब तनाव के दौरान मस्तिष्क और हृदय के बीच संचार प्रणाली कमजोर पड़ती है, तो कुछ छात्रों में चिंता और अधिक बढ़ जाती है। यह एक स्पष्ट जैविक अंतर सामने लाता है कि कौन छात्र तनाव में अनुकूलन कर पाता है और कौन नहीं।
टीम ने विशेष रूप से पाया कि जिन छात्रों में एफएए पैटर्न नकारात्मक होता है, उनमें तनाव के समय हृदय के संतुलन तंत्र की क्षमता कमजोर पड़ जाती है। इसका सीधा अर्थ है कि उनकी आंतरिक चिंता हृदय की प्रतिक्रिया को भी प्रभावित करती है, जिससे वे परीक्षा जैसी दबावपूर्ण स्थिति में अधिक तनावग्रस्त हो जाते हैं। आईआईटी मद्रास के इंजीनियरिंग डिजाइन विभाग के प्रोफेसर वेंकटेश बालासुब्रमण्यम ने बताया कि उनकी टीम ने छात्रों द्वारा स्वयं बताई गई भावनाओं के बजाय नापे जा सकने वाले शारीरिक संकेतों पर ध्यान केंद्रित किया, जिससे अधिक सटीक परिणाम मिल सकें।
इस खोज का सबसे बड़ा प्रभाव भविष्य में एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित उपकरणों के विकास पर पड़ेगा। शोधकर्ता स्वाती परमेश्वरन ने बताया कि इन शारीरिक मार्कर्स की मदद से ऐसे एआई-आधारित टूल विकसित किए जा सकते हैं, जो वास्तविक समय में यह पहचान सकें कि कौन सा छात्र परीक्षा के तनाव के जोखिम में है। एक बार पहचान हो जाने के बाद, इन उपकरणों का उपयोग व्यक्तिगत तनाव प्रबंधन कार्यक्रम तैयार करने में सहायक होगा, जिससे छात्रों को समय पर सहायता मिल सकेगी।
एनसीईआरटी के अनुसार, भारत में लगभग 81 प्रतिशत छात्र परीक्षा के तनाव से प्रभावित होते हैं, जिसका असर उनकी पढ़ाई और मानसिक स्वास्थ्य पर लंबे समय तक पड़ता है। आईआईटी मद्रास का यह शोध शिक्षा प्रणाली में तनाव प्रबंधन और छात्रों के प्रदर्शन में सुधार के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह न केवल अकादमिक सफलता को बढ़ावा देगा, बल्कि छात्रों के समग्र मानसिक कल्याण को सुनिश्चित करने में भी सहायक सिद्ध होगा, जिससे वे एक स्वस्थ और उत्पादक भविष्य की ओर अग्रसर हो सकें।
