हापुड़ में वायु प्रदूषण का कहर: ‘बेहद खराब’ AQI से सांस लेना दूभर
हापुड़ जिले में वायु प्रदूषण का स्तर चिंताजनक रूप से ‘बेहद खराब’ श्रेणी में बना हुआ है, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। रविवार को जिले का अधिकतम वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 381 दर्ज किया गया, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि हवा में सांस लेना भी दूभर हो गया है। इस गंभीर स्थिति के कारण लोगों को सांस लेने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, जिसके चलते अस्पतालों में मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है।
पिछले लगभग एक माह से जिले में प्रदूषण का स्तर लगातार खराब और बहुत खराब श्रेणी में बना हुआ है। इस कारण प्रतिदिन 100 से अधिक मरीज सांस लेने में तकलीफ, गले में खराश और चर्म रोग जैसी समस्याओं के साथ अस्पतालों का रुख कर रहे हैं। बच्चों में भी प्रदूषण के दुष्प्रभाव साफ दिखाई दे रहे हैं। प्रदूषण के कारण सिर्फ स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि लोगों को आर्थिक तौर पर भी नुकसान पहुंच रहा है।
प्रदूषण की इस विकट स्थिति के बावजूद, अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कदम न उठाना उनकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। लगातार बिगड़ती हवा से भविष्य को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। यदि अधिकारियों की यही लापरवाही जारी रही, तो यह प्रदूषण एक बड़ी और स्थायी समस्या बनकर उभर सकता है, जिससे सबसे अधिक परेशानी सांस के मरीजों को होगी। इसी के साथ चर्म रोग और गले में खराश की समस्या भी बड़े पैमाने पर लोगों को अपनी चपेट में ले लेगी।
फिजीशियन डॉ. अशरफ अली ने इस संबंध में बताया कि बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण क्रानिक आब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) एक घातक रोग बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस रोग के मरीजों की संख्या में अस्पतालों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है और सीओपीडी का एक प्रमुख कारण वायु प्रदूषण का बढ़ता स्तर भी है। डॉ. अली ने प्रदूषण से बचाव के लिए लोगों को घरों से बाहर निकलते समय अनिवार्य रूप से मास्क पहनने की सलाह दी है।
प्रदूषण के कारण आंख, गले में खराश, सांस संबंधी और चर्म रोग के मरीजों की संख्या अस्पतालों में निरंतर बढ़ रही है। हाल ही में प्रदूषण का स्तर फिर से बढ़ने के कारण इस सप्ताह मरीजों की संख्या में डेढ़ गुना तक की वृद्धि दर्ज की गई है। रविवार को छुट्टी का दिन होने के बावजूद, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के आपातकालीन कक्षों में सुबह से ही ऐसे मरीज पहुंचने शुरू हो गए थे, जिन्हें तत्काल दवा उपलब्ध कराई गई।
इस गंभीर स्थिति से निपटने और स्वयं को सुरक्षित रखने के लिए विशेषज्ञों ने कुछ उपाय सुझाए हैं: घर से बाहर निकलते समय मास्क का प्रयोग करें, एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें और अपने घरों व आसपास इंडोर पौधे लगाएं, जो हवा को शुद्ध करने में सहायक होते हैं।
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