राजनाथ सिंह का बड़ा दावा: 2026 तक खत्म होगा नक्सलवाद, आंतरिक सुरक्षा पर जोर
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर राष्ट्र को आंतरिक सुरक्षा की उभरती चुनौतियों के प्रति आगाह किया। नेशनल पुलिस मेमोरियल पर बलिदानी पुलिस बलों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए, उन्होंने कहा कि जहां एक ओर देश की सीमाओं पर अस्थिरता बनी हुई है, वहीं देश के भीतर अपराध, आतंकवाद और वैचारिक युद्ध के नए रूप तेजी से सामने आ रहे हैं। रक्षा मंत्री ने जोर देकर कहा कि ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए बाहरी और आंतरिक सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।
राजनाथ सिंह ने आंतरिक सुरक्षा के बदलते स्वरूप पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अपराध अब अधिक संगठित, अदृश्य और जटिल हो गया है, जिसका उद्देश्य समाज में अविश्वास पैदा करना और राष्ट्र की स्थिरता को चुनौती देना है। इसी क्रम में, उन्होंने नक्सलवाद पर एक बड़ी घोषणा करते हुए विश्वास जताया कि मार्च 2026 तक देश इस खतरे से पूरी तरह मुक्त हो जाएगा। उन्होंने कहा कि जो क्षेत्र कभी ‘रेड कॉरिडोर’ कहलाते थे, आज वे विकास कॉरिडोर में बदल रहे हैं, जो सरकार के प्रयासों की सफलता को दर्शाता है। उन्होंने पुलिस को आधुनिक उपकरण, ड्रोन, डिजिटल पुलिसिंग और अत्याधुनिक हथियारों से सशक्त बनाने की भी जानकारी दी।
रक्षा मंत्री ने कहा कि जब देश के नागरिक शांति से सोते हैं, तो उसकी वजह हमारी सतर्क सेना और पुलिस बलों की निरंतर चौकसी होती है। उन्होंने सीआरपीएफ, बीएसएफ और स्थानीय प्रशासन के संगठित प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इनकी बदौलत माओवादी आतंकवाद को छूट नहीं मिलने पाई और लोगों को राहत मिली। राजनाथ सिंह ने राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने में सेना और पुलिस के बीच एकता के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि दोनों बल देश की सुरक्षा में समान भावना रखते हैं। उन्होंने अपने पूर्व गृह मंत्री और वर्तमान रक्षा मंत्री के अनुभवों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये दोनों देश की सुरक्षा के स्तंभ हैं, जो सीमा पार या देश के भीतर छिपे दुश्मन से लड़ने के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि पुलिस न केवल अपराध से लड़ती है, बल्कि धारणा के स्तर पर भी हालात को संभालते हुए आधिकारिक ड्यूटी के साथ-साथ नैतिक कर्तव्य भी बखूबी निभा रही है।
पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर इंटेलिजेंस ब्यूरो (आइबी) के प्रमुख तपन डेका ने भी बलिदानी पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने बताया कि आजादी के बाद से अब तक 36,684 बहादुर जवानों ने देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है। डेका ने इस दिवस के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 21 अक्टूबर, 1969 में लद्दाख के हाट स्प्रिंग इलाके में आइबी के डीसीआइओ करम सिंह के नेतृत्व में सीआरपीएफ ने चीनी सेना से मोर्चा लिया था। इस संघर्ष में 10 जवानों की शहादत के बाद से हर साल यह दिवस मनाया जाता है। उन्होंने बीएसएफ, सीआइएसएफ, सीआरपीएफ, आइटीबीपी, एसएसबी, एनएसजी, असम राइफल्स, आरपीएफ, एनडीआरएफ और दिल्ली पुलिस के जवानों द्वारा निकाली गई संयुक्त परेड का भी जिक्र किया।
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