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रूस से तेल खरीद में भारत दूसरे स्थान पर, चीन सबसे आगे: पश्चिमी देशों की चिंताएँ

By Nov 15, 2025

अमेरिकी आपत्तियों और पश्चिमी देशों के लगातार दबाव के बावजूद, भारत रूस से तेल आयात करने वाले देशों में दूसरे स्थान पर आ गया है। अक्टूबर माह में भारत ने रूस से 2.5 अरब डॉलर का कच्चा तेल खरीदा, जिससे वह चीन के बाद रूस का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बन गया। यह आयात यूक्रेन में जारी युद्ध के बीच पश्चिमी देशों की चिंताओं को बढ़ा रहा है कि इससे मॉस्को को वित्तीय सहायता मिल रही है।

हेलसिंकी स्थित सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) के आंकड़ों के अनुसार, भारत ने अक्टूबर में 2.5 अरब डॉलर मूल्य के रूसी कच्चे तेल का आयात किया, जबकि चीन ने इसी अवधि में 3.7 अरब डॉलर का तेल खरीदा, जिससे वह पहले स्थान पर रहा। कुल मिलाकर, रूस से भारत का कच्चे तेल का आयात 3.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जबकि चीन का कुल आयात 5.8 अरब डॉलर रहा। तुर्की 2.7 अरब डॉलर के आयात के साथ तीसरे और यूरोपीय संघ 1.1 अरब डॉलर मूल्य के रूसी ऊर्जा उत्पादों के साथ चौथे स्थान पर रहा।

पश्चिमी देशों ने बार-बार भारत और चीन से रूसी तेल की अपनी खरीद को सीमित करने का आग्रह किया है। उनकी मुख्य चिंता यह है कि रूस के ऊर्जा निर्यात से प्राप्त राजस्व यूक्रेन में उसके सैन्य अभियानों को वित्तपोषित कर रहा है। अमेरिका और यूरोपीय संघ ने रूस पर कई प्रतिबंध लगाए हैं, लेकिन भारत और चीन जैसे बड़े खरीदार इन प्रतिबंधों के दायरे से बाहर रहकर रूसी तेल खरीद रहे हैं, जिससे रूस को एक महत्वपूर्ण आय स्रोत मिल रहा है।

हालांकि, पिछले महीने रूस के प्रमुख तेल निर्यातकों, रोसनेफ्ट और लुकोइल पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों का असर दिसंबर के आयात आंकड़ों पर दिखाई देने की उम्मीद है। इन प्रतिबंधों से भारतीय कंपनियों के लिए रूसी तेल खरीदना थोड़ा और जटिल हो सकता है, हालांकि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देता रहा है। कोयले के आयात के संदर्भ में, चीन रूसी कोयले का शीर्ष खरीदार बना हुआ है, जबकि भारत और तुर्की दूसरे स्थान पर हैं। अक्टूबर में भारत ने 351 मिलियन डॉलर का रूसी कोयला और 222 मिलियन डॉलर मूल्य के तेल उत्पादों का भी आयात किया।

भारत का यह कदम उसकी विदेश नीति और ऊर्जा आवश्यकताओं के संतुलन को दर्शाता है। एक ओर, भारत अंतरराष्ट्रीय संबंधों में अपनी स्वायत्तता बनाए रखना चाहता है, वहीं दूसरी ओर, वह अपने नागरिकों के लिए सस्ती ऊर्जा सुनिश्चित करने के लिए विकल्प तलाश रहा है। यूक्रेन युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता के बीच, रूस से रियायती दरों पर तेल खरीदना भारत के लिए एक रणनीतिक निर्णय रहा है। यह स्थिति वैश्विक भू-राजनीति में भारत की बढ़ती भूमिका और चुनौतियों को भी उजागर करती है।

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