फतेहपुर सीकरी के 7000 साल पुराने प्राचीन शैल चित्र अब संरक्षित धरोहर घोषित | agra news
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने ऐतिहासिक कदम उठाते हुए फतेहपुर सीकरी की अरावली पहाड़ियों में स्थित सात हजार साल पुरानी प्रागैतिहासिक काल की शैल कला को संरक्षित धरोहर के दायरे में लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इन प्राचीन कलाकृतियों को लंबे समय से अवैध खनन और उपेक्षा का सामना करना पड़ रहा था, जिससे इनके अस्तित्व पर बड़ा संकट मंडरा रहा था।
अधिकारियों के अनुसार, रसूलपुर, मदनपुरा, पतसाल और जाजौली क्षेत्रों में उत्तर पाषाण काल से लेकर गुप्त काल तक के शैल चित्र मौजूद हैं। इनमें रसूलपुर के शैल आश्रय को ‘चील की गुफा’ और पतसाल के आश्रय को ‘नाई की गुफा’ के नाम से पहचाना जाता है। दो दशक पहले खनन गतिविधियों पर रोक लगने से कुछ अवशेष सुरक्षित बच गए थे, जो अब उचित संरक्षण न मिलने के कारण खराब हो रहे थे।
दिल्ली स्थित केंद्रीय तकनीकी मूल्यांकन समिति की मंजूरी के बाद, विभाग ने इन महत्वपूर्ण स्थलों को संरक्षित स्मारक घोषित करने की प्रारंभिक अधिसूचना जारी करते हुए साठ दिन की अवधि में आपत्तियां आमंत्रित की हैं। इन आपत्तियों के निपटारे के बाद अंतिम अधिसूचना लागू होगी। आगरा सर्किल के अंतर्गत प्रागैतिहासिक काल की यह पहली ऐसी धरोहर होगी जिसे संरक्षण मिलने जा रहा है।
इन शैल चित्रों के संरक्षित होने से न केवल हमारी प्राचीन संस्कृति और इतिहास के अनछुए पहलुओं को सुरक्षित रखा जा सकेगा, बल्कि यह क्षेत्र ऐतिहासिक पर्यटन के मानचित्र पर भी एक मजबूत पहचान बनाएगा। स्थानीय स्तर पर ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण से भावी पीढ़ियों को अपने गौरवशाली अतीत से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
