भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट, निवेशकों के डूबे 30 लाख करोड़ रुपये | business news
भारतीय शेयर बाजार के लिए साल 2026 निवेशकों की उम्मीदों के बिल्कुल विपरीत साबित हुआ है। बाजार में आई इस ऐतिहासिक सुस्ती के चलते निवेशकों की गाढ़ी कमाई का बड़ा हिस्सा डूब चुका है। जनवरी के शुरुआती हफ्तों में जो बाजार रिकॉर्ड ऊंचाई पर ट्रेड कर रहा था, वह अब भारी बिकवाली के दबाव में बुरी तरह लड़खड़ा गया है।
जनवरी महीने में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 85,762 के रिकॉर्ड स्तर पर था, जो अब गिरकर 73,000 के आसपास आ चुका है। इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी अपने उच्चतम स्तर से करीब 3,700 अंक यानी लगभग 15 प्रतिशत तक लुढ़क चुका है। इसि बीच, बीएसई का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन जो कभी 481 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया था, घटकर अब 451 लाख करोड़ रुपये पर सिमट गया है। सीधे शब्दों में कहें तो निवेशकों की संपत्ति में 30 लाख करोड़ रुपये की भारी कमी आई है, जिसका सीधा असर आम निवेशकों के पोर्टफोलियो पर पड़ा है।
बाजार में इस भारी गिरावट के पीछे विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की आक्रामक बिकवाली को सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है। साल 2025 के मुकाबले विदेशी निवेशकों ने इस साल भारतीय बाजारों से कई गुना ज्यादा पैसा बाहर निकाला है। अक्टूबर के महीने में ही विदेशी निवेशकों ने हजारों करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं, जिससे बाजार को संभालने का कोई मौका नहीं मिल पा रहा है। इस मंदी के दौर से देश के खुदरा निवेशकों को भारी आर्थिक मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि जानकारों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच बाजार में यह अस्थिरता अभी कुछ और समय तक बनी रह सकती है।
