सोनभद्र: प्रेमकली हत्याकांड में 10 साल बाद न्याय, चार दोषियों को आजीवन कारावास
सोनभद्र में एक दशक से भी अधिक पुराने प्रेमकली हत्याकांड में न्याय का इंतजार अब समाप्त हो गया है। अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम जीतेंद्र कुमार द्विवेदी की अदालत ने बुधवार को इस मामले में चार दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही, प्रत्येक दोषी पर 20-20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। अर्थदंड न देने की स्थिति में दोषियों को चार-चार माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी।
यह घटना पिपरी थाना क्षेत्र के कोटा ग्राम पंचायत में वर्ष 2015 में घटित हुई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, घोरावल निवासी राम प्रसाद गोड़ ने 24 मई 2015 को घोरावल थाने में तहरीर दी थी। उन्होंने बताया था कि 23/24 मई 2015 की रात उनकी पत्नी प्रेमकली दरवाजे पर सोई हुई थीं। गांव के ही रामनरेश, रामबदन, माता प्रसाद और राम प्रसाद गोड़ ने जंगल की जमीन के कब्जेदारी के विवाद को लेकर उनकी पत्नी प्रेमकली की टंगारी (कुल्हाड़ी) से मारकर हत्या कर दी थी। राम प्रसाद गोड़ की तहरीर पर पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर विवेचना प्रारंभ की थी।
विवेचक द्वारा पर्याप्त सबूत एकत्रित किए जाने के बाद कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई। करीब नौ वर्षों तक चली सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्कों को सुना, गवाहों के बयानों को रिकॉर्ड किया और पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्यों का गहन अवलोकन किया। इन सभी के आधार पर अदालत ने राम नरेश गोड़, राम बदन गोड़, माता प्रसाद और राम प्रसाद गोड़ को हत्या का दोषी पाया।
अदालत ने दोषसिद्ध होने के बाद चारों दोषियों को न्यायिक हिरासत में लेकर जिला कारागार गुरमा भेज दिया। सरकारी वकील विनोद कुमार पाठक ने अभियोजन पक्ष की ओर से इस मामले में जोरदार बहस की। इस फैसले के बाद, जेल में बिताई गई अवधि को दोषियों की सजा में समाहित किया जाएगा। यह फैसला दर्शाता है कि गंभीर अपराधों में न्याय भले ही देर से मिले, लेकिन मिलता अवश्य है।
