रूस में प्लेग के मामलों पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान, जल्द सामने आएगी सच्चाई | international news
रूस के साइबेरिया स्थित एक एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट में काम करने वाली 28 वर्षीय महिला की मौत के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हड़कंप मच गया है। दो अक्टूबर को अज्ञात कारणों से हुए निमोनिया के चलते इस महिला की जान चली गई थी। इस घटना के बाद से सुरक्षा एजेंसियों और स्वास्थ्य महकमे में चिंता का माहौल है, क्योंकि मृतका जिस संस्थान में कार्यरत थी, वहां बेहद खतरनाक बीमारियों पर शोध किया जाता है।
घटना के सामने आने के बाद मृतका के संपर्क में आए करीब 200 लोगों को तुरंत मेडिकल निगरानी में रखा गया है। हालांकि, राहत की बात यह है कि अभी तक इनमें से किसी भी व्यक्ति में प्लेग के संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जब यह सवाल किया गया कि क्या रूस में फैला यह प्लेग कोई बायोवेपन है, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि वे जल्द ही इसकी तह तक पहुंचेंगे। ट्रंप के मुताबिक, अभी के हालातों को देखकर ऐसा नहीं लगता कि यह कोई जैविक हथियार है और रूसी दावों के अनुसार स्थिति नियंत्रण में है।
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, प्लेग ‘येर्सिनिया पेस्टिस’ नामक बैक्टीरिया से फैलने वाली एक गंभीर बीमारी है, जो आमतौर पर छोटे जीवों और उनके पिस्सुओं में पाई जाती है। इसके रूपों में न्यूमोनिक प्लेग सीधे फेफड़ों पर हमला करता है और संक्रमित व्यक्ति की सांस के जरिए दूसरों में भी फैल सकता है। इस पूरी घटना ने वैश्विक स्तर पर प्रयोगशालाओं की सुरक्षा और जैविक अनुसंधान के नियमों को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
