जीएसटी कानून में बदलाव की तैयारी, अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्ति पर लग सकती है रोक | national news
देश के कर ढांचे को अधिक सरल और सहज बनाने की दिशा में केंद्र सरकार एक अहम कदम उठाने जा रही है। वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी कानून के तहत कारोबारियों को बड़ी राहत देने के लिए नियमों में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इस प्रस्तावित बदलाव के तहत जीएसटी अधिकारियों के पास मौजूद सीधे गिरफ्तारी की शक्ति को वापस लिया जा सकता है।
मौजूदा व्यवस्था के अनुसार, कुछ गंभीर मामलों में कर अधिकारी कमिश्नर स्तर की मंजूरी के बाद सीधे गिरफ्तारी कर सकते हैं। हालांकि, नए प्रस्ताव पर सहमति बनने के बाद किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तारी के लिए अदालत की मंजूरी अनिवार्य हो सकती है। इसके साथ ही, आपराधिक मुकदमा शुरू करने की सीमा को भी वर्तमान 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये किए जाने पर विचार किया जा रहा है, ताकि केवल बड़े और गंभीर मामलों को ही आपराधिक दायरे में रखा जा सके।
कर प्रणाली में सुधार और अनुपालन को आसान बनाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया जा रहा है। सरकार का जोर अब तकनीक के माध्यम से कर चोरी पकड़ने पर है, क्योंकि मौजूदा डिजिटल सिस्टम खरीदार और विक्रेता के आंकड़ों का स्वतः मिलान कर लेता है। इससे फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट और गड़बड़ियों की पहचान शुरुआती स्तर पर ही संभव हो जाती है।
कारोबारियों को दी जा रही इन राहतों का उद्देश्य व्यापार करने को सुगम बनाना और अनुपालन लागत को घटाना है। हालांकि, गिरफ्तारी के प्रावधानों में नरमी का यह अर्थ नहीं है कि कर चोरी करने वालों को पूरी छूट मिल जाएगी। नियमों के तहत बकाया कर, ब्याज और भारी जुर्माना वसूलने की प्रक्रिया पूरी सख्ती के साथ जारी रहेगी, जिससे सरकारी राजस्व सुरक्षित रहे।
