जेल से बाहर आते ही फिर सक्रिय हुआ दवा माफिया हिमांशु, किराए के गोदाम से चल रहा था नकली दवाओं का अवैध कारोबार | agra news
जेल की हवा खाने के बाद भी अपराधियों की मानसिकता में सुधार नहीं होता है, जिसका ताजा उदाहरण आगरा में देखने को मिला है। एसटीएफ को भारी-भरकम रिश्वत देने के आरोप में पूर्व में जेल जा चुका कुख्यात दवा माफिया हिमांशु अग्रवाल जमानत पर बाहर आते ही फिर से अपने पुराने अवैध धंधे में सक्रिय हो गया था। इस बार उसने पुलिस और प्रशासन की नजरों से बचने के लिए शहर में अपना ठिकाना बदल लिया था और किराए के गोदाम के जरिए नकली दवाओं का काला कारोबार संचालित कर रहा था।
मामले का खुलासा तब हुआ जब एक स्थानीय गोदाम पर औचक छापेमारी की गई। जांच के दौरान यह बात सामने आई कि आरोपी ने अपने पुराने नेटवर्क का इस्तेमाल करते हुए विभिन्न बहुराष्ट्रीय कंपनियों के नाम पर मधुमेह और दर्द निवारक जैसी गंभीर बीमारियों की नकली दवाएं बाजार में खपानी शुरू कर दी थीं। इस अवैध कारोबार के खुलासे से स्वास्थ्य विभाग में भी हड़कंप मच गया है, क्योंकि इस तरह की नकली दवाएं आम जनता के जीवन के साथ सीधा खिलवाड़ करती हैं।
कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने मौके से तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया है, जिनकी पहचान इकरार, शामिन उर्फ छोटू और सलुआ उर्फ मुकीम के रूप में हुई है। पूछताछ में इन आरोपियों ने खुलासा किया कि उन्हें यह खेप ट्रांसपोर्टर आशीष जैन के जरिए हिमांशु अग्रवाल से मिली थी। हालांकि, मुख्य सरगना हिमांशु पुलिस के हाथ लगने से पहले ही अपना गोदाम खाली कर फरार होने में कामयाब रहा। तलाशी के दौरान आरोपियों के मोबाइल फोन से कई अहम सुराग और वीडियो मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि छापेमारी से ठीक पहले बड़ी मात्रा में नकली दवाओं को नष्ट करने के लिए जलाया भी गया था।
प्रशासन अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से छानबीन कर रहा है कि यह नकली दवाएं उत्तर प्रदेश और राजस्थान के किन-किन मेडिकल स्टोरों तक पहुंचाई गई थीं। इस तरह के मामलों से आम लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडराता है, इसलिए पुलिस फरार आरोपियों की धरपकड़ के लिए लगातार दबिश दे रही है और जल्द ही पूरे सिंडिकेट का पर्दाफाश होने की उम्मीद है।
