मतदाता सूची पुनरीक्षण विवाद के बाद चुनाव आयोग का बड़ा फैसला, फॉर्म-6 से अतिरिक्त घोषणा पत्र हटाया | election commission news
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चल रहे विवाद के बीच भारत निर्वाचन आयोग ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। आयोग ने फॉर्म-6 के साथ जोड़े गए अतिरिक्त घोषणा पत्र यानी Annexure-D की अनिवार्यता को अब हटा दिया है। जिन राज्यों में SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहाँ ऑनलाइन पोर्टल पर फॉर्म-6 का पुराना और मूल स्वरूप वापस बहाल कर दिया गया है।
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब निर्वाचन आयोग ने SIR प्रक्रिया के तहत फॉर्म-6 के साथ एक अतिरिक्त घोषणा पत्र अनिवार्य कर दिया था। इसके तहत आवेदकों को वर्ष 2000 के शुरुआती दौर की मतदाता सूची से अपने परिवार का मिलान करने और पिछले विधानसभा क्षेत्र, पोलिंग बूथ तथा सीरियल नंबर जैसी जानकारियां देनी पड़ रही थीं। पोर्टल पर तकनीकी रूप से यह अनिवार्यता होने के कारण नए मतदाताओं को पंजीकरण में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।
आंतरिक स्तर पर भी इस प्रक्रिया को लेकर सवाल उठे थे, क्योंकि जानकारों और कुछ सदस्यों का मानना था कि वैधानिक फॉर्म-6 के नियमों में बदलाव का अधिकार केवल विधिवत प्रक्रिया के तहत है। इस आंतरिक मतभेद और बढ़ते विवाद के बाद आयोग ने यह सुधारात्मक कदम उठाया है।
इस बदलाव से देश के उन इलाकों में युवाओं को बड़ी राहत मिली है जो पहली बार अपने मताधिकार का प्रयोग करने जा रहे हैं। अब 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके नए युवा मतदाता बिना किसी जटिल पारिवारिक मैपिंग या पुराने चुनावी रिकॉर्ड के आसानी से अपना पंजीकरण करा सकेंगे। इससे न केवल चुनावी प्रक्रिया सरल होगी, बल्कि पात्र नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकार सुरक्षित रहेंगे।
