दिल्ली में प्रदूषण के खिलाफ बड़ा कदम, छोटी सड़कों पर दौड़ेंगी इलेक्ट्रिक मशीनें और आईआईटी के साथ होगी रियल-टाइम निगरानी | delhi pollution control
राष्ट्रीय राजधानी में जहरीली हवा और बढ़ते प्रदूषण से निपटने के लिए प्रशासन ने अब जमीनी स्तर के साथ-साथ वैज्ञानिक तकनीकों का सहारा लेने का निर्णय लिया है। दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में दो बड़े प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है, जिनका उद्देश्य केवल सर्दियों में ही नहीं बल्कि पूरे साल प्रदूषण के विभिन्न स्रोतों पर प्रभावी ढंग से लगाम कसना है। इन नई पहलों से शहर के स्थानीय निवासियों को साफ हवा मिलने की उम्मीद जगी है और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले बुरे असर को कम किया जा सकेगा।
छोटी सड़कों पर ई-मशीनों से सफाई
योजना के पहले चरण में दस मीटर से कम चौड़ाई वाली करीब 609 किलोमीटर लंबी छोटी सड़कों को मैकेनिकल सफाई के दायरे में लाया जाएगा। इसके लिए नगर निगम को तीस इलेक्ट्रिक व्हीकल आधारित मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनें उपलब्ध कराई जाएंगी। इस पूरी व्यवस्था पर आगामी दस वर्षों के दौरान लगभग 393.73 करोड़ रुपये की राशि खर्च किए जाने का अनुमान है। सरकार का मानना है कि सड़कों पर उड़ने वाली धूल प्रदूषण का एक बड़ा कारण है, इसलिए अब मुख्य मार्गों के अलावा तंग गलियों और छोटी सड़कों पर भी धूल को नियंत्रित किया जा सकेगा।
आईआईटी दिल्ली के साथ वैज्ञानिक निगरानी
प्रदूषण के असली कारणों का सटीक पता लगाने के लिए सरकार ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानी आईआईटी दिल्ली के साथ हाथ मिलाया है। इसके तहत हवा में मौजूद सूक्ष्म कणों जैसे पीएम 2.5 और पीएम 10 की रियल-टाइम सोर्स अपोर्शनमेंट तकनीक के जरिए लगातार निगरानी की जाएगी। इस पांच वर्षीय परियोजना पर करीब 19.22 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके अंतर्गत राउज एवेन्यू स्थित सुपर साइट और मोबाइल लैब को दोबारा सक्रिय किया जाएगा, ताकि विभिन्न हॉटस्पॉट पर प्रदूषण के स्रोतों का तुरंत आकलन कर सख्त कदम उठाए जा सकें।
