सपा महानगर उपाध्यक्ष के फर्जी निष्कासन पत्र से मचा बवाल, पार्टी नेताओं में तनातनी तेज | agra news
उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में समाजवादी पार्टी का अंदरूनी कलह किसी से छिपा नहीं है। हाल ही में संगठन के भीतर मचे घमासान के बीच एक नया विवाद सामने आया है, जहां पार्टी के ही एक पदाधिकारी को निष्कासित करने का फर्जी पत्र तेजी से वायरल हो गया। इस घटनाक्रम से कार्यकर्ताओं में असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है और राजनीतिक हलकों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं [agra news]।
सोमवार को सोशल मीडिया पर एक पत्र वायरल हुआ, जिसमें महानगर उपाध्यक्ष रामनरेश यादव को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में बाहर किए जाने की बात कही गई थी। पत्र सामने आते ही पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं ने मोर्चा खोल दिया और नेतृत्व की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आम जनता और कार्यकर्ताओं के बीच यह चर्चा का विषय बन गया है कि संगठन के भीतर चल रही यह खींचतान आगामी चुनावों में पार्टी की छवि को कितना नुकसान पहुंचा सकती है।
मामले तूल पकड़ने के बाद महानगर अध्यक्ष शब्बीर अब्बास ने सामने आकर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने वायरल पत्र को पूरी तरह फर्जी करार दिया और कहा कि यह उनकी छवि धूमिल करने की एक सोची-समझी साजिश है। उन्होंने बताया कि इस फर्जीवाड़े के पीछे एक फेक आईडी का इस्तेमाल किया गया है और पुलिस में इसकी औपचारिक शिकायत दर्ज कराई जाएगी। संगठन के जिम्मेदार अधिकारियों का कहना है कि पार्टी की एकता को तोड़ने वाले ऐसे तत्वों को बख्शा नहीं जाएगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के आंतरिक विवाद और फर्जी पत्र वार से पार्टी का जमीनी स्तर पर मनोबल प्रभावित होता है। यदि समय रहते शीर्ष नेतृत्व ने इन विवादों को नहीं सुलझाया, तो इसका सीधा असर चुनावी तैयारियों पर पड़ सकता है। फिलहाल, पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि इस फर्जीवाड़े के पीछे वास्तव में किसका हाथ था।
