पितृपक्ष में आज द्वितीया तिथि का श्राद्ध, जानें तर्पण और पिंडदान का शुभ मुहूर्त | religion news
पितृपक्ष का पावन समय चल रहा है और आज के दिन द्वितीया तिथि का श्राद्ध किया जा रहा है। सनातन परंपरा में इस अनुष्ठान का विशेष महत्व माना गया है, क्योंकि ऐसा विश्वास है कि इससे पूर्वजों की आत्मा को तृप्ति मिलती है और उनका आशीर्वाद परिवार पर सदैव बना रहता है (religion news)। इस विशेष अवसर पर उन पूर्वजों को याद किया जाता है, जिनकी मृत्यु किसी भी मास की कृष्ण या शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को हुई थी।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्राद्ध कर्म करने से पारिवारिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और पितृ दोष का प्रभाव समाप्त होता है। आज के दिन सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर पूरी श्रद्धा के साथ अनुष्ठान करने का विधान है। पंचांग के अनुसार द्वितीया तिथि का समापन आज शाम को होगा, इसलिए उदिया तिथि के आधार पर आज ही के दिन पिंडदान करना श्रेष्ठ माना गया है।
तर्पण और पिंडदान के लिए पंचांग के नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है। दोपहर के समय कुतुप वेला को श्राद्ध कर्म के लिए सबसे उत्तम काल माना गया है। इस दौरान चावल, दूध, घी, शहद और काले तिल का उपयोग करके पिंडदान किया जाता है। इसके पश्चात हाथ में कुशा धारण करके जल और काले तिल से पितरों का तर्पण संपन्न किया जाता है।
धार्मिक अनुष्ठान की पूर्णता के लिए गरीबों को भोजन कराना और दान-दक्षिणा देना आवश्यक माना गया है। इसके अलावा भोजन का एक अंश गाय, कुत्ते, कौवे और चींटियों के लिए भी निकाला जाता है, जिसे पंचबलि कहा जाता है। आधुनिक भागदौड़ के बीच इन परंपराओं का निर्वाह करने से आने वाली पीढ़ियों में सांस्कृतिक मूल्यों का संचार होता है और समाज में धार्मिक तथा नैतिक चेतना मजबूत होती है।
