पितृपक्ष में प्रतिपदा तिथि का श्राद्ध आज, जानें पिंडदान और तर्पण की सही विधि | religious news
हिंदू पंचांग के अनुसार पितृ पक्ष की शुरुआत हो चुकी है, जो पूर्वजों को समर्पित होती है। इस विशेष अवधि में लोग अपने दिवंगत पूर्वजों की तिथि के अनुसार उनका पिंडदान और तर्पण करते हैं। आज प्रतिपदा तिथि का श्राद्ध किया जा रहा है [religious news], जो उन पूर्वजों के लिए है जिनकी मृत्यु पंचांग की प्रतिपदा तिथि को हुई थी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन अनुष्ठानों को पूरी निष्ठा के साथ करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
धार्मिक अनुष्ठान और शुभ मुहूर्त
श्राद्ध कर्म के दौरान दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठना अनिवार्य माना गया है। चावल, जौ, काले तिल, घी और शहद के मिश्रण से पिंडदान किया जाता है, जबकि कुशा से बनी अंगूठी पहनकर जल अर्पित करने की प्रक्रिया को तर्पण कहते हैं। तर्पण और पिंडदान के लिए कुतुप मुहूर्त को सबसे उत्तम माना गया है, जो आमतौर पर दोपहर के समय होता है। इस दौरान सही समय का चयन करने के लिए पंचांग की मदद ली जाती है ताकि अनुष्ठान का पूर्ण फल प्राप्त हो सके।
भोजन दान और पंचबली का महत्व
श्राद्ध कर्म संपन्न होने के बाद पांच जरूरतमंद ब्राह्मणों को भोजन कराने और अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान-दक्षिणा देने की परंपरा है। इसके साथ ही गाय, कुत्ता, कौआ और चींटी जैसे विभिन्न जीवों के लिए भोजन का अंश निकाला जाता है, जिसे पंचबली कहा जाता है। आधुनिक समय में परिवार की परंपराओं के अनुसार पुरुष के साथ-साथ महिलाएं भी इस अनुष्ठान को पूरी श्रद्धा के साथ निभा रही हैं।
