ट्रेन के गेट पर लगी छोटी सीट का क्या होता है असली इस्तेमाल | national news
भारतीय रेल से सफर करना करोड़ों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है। ट्रेन के भीतर सफर के दौरान अक्सर यात्रियों की नजर गेट के पास बनी एक छोटी सी फोल्डिंग सीट पर पड़ती है। इस सीट को लेकर अक्सर यह असमंजस रहता है कि क्या यह टीटीई के बैठने के लिए है या फिर इस पर कोई आम यात्री भी बैठ सकता है। रेलवे नियमों के मुताबिक ट्रेन में हर इंच जगह का एक निश्चित उद्देश्य होता है [national news]।
ट्रेन के दरवाजों के आसपास का हिस्सा रेलवे कर्मचारियों के कामकाज के लिहाज से महत्वपूर्ण होता है। कई कोचों में गेट के पास जो छोटी सीट या बैठने की व्यवस्था होती है, वह मुख्य रूप से ड्यूटी पर तैनात स्टाफ या टीटीई के विश्राम के लिए हो सकती है। हालांकि, इसे लेकर कोई एकरूपी नियम नहीं है क्योंकि कुछ ट्रेनों में यह कोच की नियमित सीटिंग व्यवस्था का हिस्सा भी हो सकती है जिसका नंबर यात्रियों को आवंटित किया जाता है।
यदि गेट के पास वाली सीट रेलवे स्टाफ के उपयोग के लिए निर्धारित है, तो यात्रियों को उस पर बैठने से बचना चाहिए। वहीं अगर उस सीट का नंबर बाकायदा टिकट बुकिंग में शामिल है और किसी यात्री को अलॉट हुई है, तो उस पर केवल वही यात्री बैठ सकता है। टीटीई का काम पूरे कोच में घूमकर टिकट चेक करना होता है, इसलिए उनका किसी एक जगह पर लगातार बैठे रहना अनिवार्य नहीं होता है। सफर के दौरान नियमों की जानकारी होने से अनावश्यक भ्रम से बचा जा सकता है।
