ऑनलाइन शॉपिंग में धोखाधड़ी या ऑर्डर कैंसिलेशन पर कंपनियों पर होती है कार्रवाई | national consumer rights news
आज के डिजिटल युग में ऑनलाइन शॉपिंग हमारी जीवनशैली का एक अहम हिस्सा बन चुकी है, लेकिन कई बार यह सुविधा ग्राहकों के लिए बड़ी परेशानी का सबब बन जाती है। कई बार लोग सामान ऑर्डर कुछ और करते हैं और पार्सल में कुछ और ही निकल आता है, या फिर बिना किसी ठोस कारण के कंपनियों द्वारा ऑर्डर रद्द कर दिए जाते हैं। ऐसे मामलों में अक्सर ग्राहक कस्टमर केयर के चक्कर काटकर थक जाते हैं और समाधान न मिलने पर नुकसान उठा लेते हैं। लेकिन उपभोक्ता संरक्षण कानूनों के तहत अब ऐसी लापरवाहियों पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान है [national consumer rights news]।
देश के विभिन्न उपभोक्ता आयोगों ने कई ऐसे मामलों में ई-कॉमर्स दिग्गजों पर भारी जुर्माना लगाया है जहां ग्राहकों के अधिकारों का हनन हुआ है। उदाहरण के लिए, तमिलनाडु और हरियाणा के उपभोक्ता आयोगों के ऐसे कई फैसले सामने आए हैं जहां गलत ब्रांड का सामान भेजने या बिना ग्राहक की सहमति के ऑर्डर रद्द करने पर कंपनियों को हर्जाना भरना पड़ा। आयोग ने स्पष्ट किया है कि सेवा में किसी भी तरह की कमी या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और प्रभावित ग्राहक मानसिक परेशानी और मुकदमे के खर्च के रूप में मुआवजे के हकदार हैं। इस तरह के फैसलों से आम जनता में अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ रही है और कंपनियों की मनमानी पर लगाम लग रही है।
यदि आपके साथ भी ऑनलाइन शॉपिंग में किसी प्रकार की ठगी या लापरवाही होती है, तो सबसे पहले कंपनी के ग्रिवांस ऑफिसर के पास अपनी शिकायत दर्ज कराएं। इसके लिए ऑर्डर रसीद, पेमेंट का स्क्रीनशॉट, बिल और डिलीवर हुए पैकेट की फोटो या वीडियो जैसे सबूत संभालकर रखना बेहद जरूरी है। यदि कंपनी स्तर पर संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो आप राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन नंबर 1915 या व्हाट्सएप के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं। इसके बाद भी बात न बनने पर उपभोक्ता अदालत का दरवाजा खटखटाना एक प्रभावी विकल्प है।
