धौलपुर में भारी बारिश से डूबी बाजरे की फसल, कूलर की टंकियों को नाव बनाकर बालियां बचाने में जुटे किसान | rajasthan news
राजस्थान के धौलपुर जिले में मौसम की मार ने अन्नदाताओं की कमर तोड़ दी है। भादौ महीने में हुई मूसलाधार बारिश के चलते जिले के ग्रामीण इलाकों में भारी तबाही देखने को मिली है। हालात यह हैं कि सैंपऊ क्षेत्र समेत कई इलाकों में हजारों बीघा में लहलहाती बाजरे की फसल पानी में पूरी तरह डूब चुकी है। खेतों के तालाब बन जाने के कारण किसानों की पककर तैयार फसल बर्बाद होने के कगार पर पहुंच गई है (rajasthan news)।
खेतों में तीन से चार फीट तक पानी भर जाने के कारण बाजरे के पौधे पूरी तरह ओझल हो चुके हैं। इस विपदा की घड़ी में अन्नदाताओं ने हार मानने के बजाय अनूठा जुगाड़ अपनाया है। परऊआ सहित कई गांवों के किसानों ने कूलर की पुरानी टंकियों और प्लास्टिक के टबों को नाव का रूप दे दिया है। इन अस्थायी नावों के जरिए किसान पानी के बीच उतरकर बची-कुची फसल की बालियां काटने के लिए मजबूर हैं। इस आपदा से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनका जीवन संकट में आ गया है।
पानी के बीच उतरने से जोक, सांप और अन्य जहरीले कीड़ों का खतरा भी पैदा हो गया है। इस खतरे से निपटने के लिए ग्रामीण अपने पैरों पर प्लास्टिक के बोरे, कपड़े और मोजे बांधकर पानी में उतर रहे हैं। परिवार के सभी सदस्य—महिलाएं, पुरुष और युवा—दिन-रात इस जद्दोजहद में जुटे हैं कि किसी तरह सड़ने से पहले फसल के दाने सुरक्षित बाहर निकाले जा सकें। स्थानीय प्रशासन से किसानों को उचित मुआवजा दिए जाने की मांग जोर पकड़ रही है, ताकि इस भारी नुकसान से प्रभावित परिवारों को संबल मिल सके (rajasthan news)।
