आगरा में तालाबों पर अतिक्रमण को लेकर एनजीटी सख्त, उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी | agra news
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने आगरा में जल स्रोतों के अस्तित्व पर मंडराते खतरे का स्वतः संज्ञान लिया है। एनजीटी के चेयरपर्सन न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डा. अफरोज अहमद की बेंच ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार से दस सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। यह कदम स्थानीय स्तर पर पर्यावरण संतुलन बनाए रखने और भूगर्भ जल स्तर को सुरक्षित रखने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है [agra news]।
अतिक्रमण और प्रदूषण के इस गंभीर मामले की तह तक जाने के लिए एनजीटी ने एक संयुक्त समिति का गठन किया है। इस समिति में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधि, पर्यावरण मंत्रालय के क्षेत्रीय अधिकारी, ताज ट्रेपेजियम जोन अथॉरिटी के प्रतिनिधि और जिला मजिस्ट्रेट को शामिल किया गया है। यह समिति मौके की जांच कर अपनी रिपोर्ट पेश करेगी। इसके अलावा, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को तालाबों के पानी के नमूने लेकर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।
उल्लेखनीय है कि शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक फैले तालाबों और पोखरों पर अवैध कब्जों के कारण जल निकासी और भूजल संचयन की व्यवस्था चरमरा गई है। तालाबों में लगातार गिर रहा गंदा पानी और कचरा पर्यावरण के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है। एनजीटी की इस सख्ती से स्थानीय प्रशासन पर जल निकायों के जीर्णोद्धार और संरक्षण को लेकर दबाव बढ़ गया है, जिससे आने वाले समय में सख्त कार्रवाई की उम्मीद है।
