लाल सागर में संकट के बाद सऊदी अरब ने फारस की खाड़ी से बढ़ाई कच्चे तेल की सप्लाई | world news
लाल सागर में सुरक्षा संकट और हालिया ड्रोन हमलों के बाद ऊर्जा बाजार में बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। सऊदी अरब ने स्थिति से निपटने के लिए फारस की खाड़ी में स्थित अपने पूर्वी बंदरगाहों से कच्चे तेल के निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि की है। सैटेलाइट तस्वीरों और शिपिंग डेटा से यह बात सामने आई है कि देश अपनी ऊर्जा आपूर्ति को बनाए रखने के लिए वैकल्पिक मार्गों का आक्रामक रूप से उपयोग कर रहा है [world news]।
हाल ही में सऊदी अरामको द्वारा मिडिल ईस्ट गल्फ के प्रमुख रास तनूरा बंदरगाह पर विशाल तेल जहाजों में भारी मात्रा में कच्चे तेल की लदान की गई है। टैंकरों की गतिविधियों पर नजर रखने वाले डेटा के अनुसार, फारस की खाड़ी के टर्मिनलों से निर्यात में आई इस तेजी से वैश्विक बाजार में सकारात्मक संदेश गया है। इस रणनीतिक कदम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है, जिससे दुनिया भर के उपभोक्ताओं और अर्थव्यवस्थाओं को बड़ी राहत मिली है।
इससे पहले, 13 सितंबर को हुए ड्रोन हमलों के कारण सऊदी अरब को अपनी मुख्य ‘ईस्ट-वेस्ट ऑयल पाइपलाइन’ बंद करनी पड़ी थी, जिससे लाल सागर के यानबू बंदरगाह से होने वाला निर्यात पूरी तरह ठप हो गया था। इस व्यवधान के बाद कंपनी ने यूरोपीय खरीदारों के कुछ सौदे रद्द किए, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य के भीतर स्थित अपने पूर्वी बंदरगाहों से एशियाई बाजारों के लिए आपूर्ति को कई गुना बढ़ा दिया। विश्लेषकों का मानना है कि सऊदी अरब की यह त्वरित प्रतिक्रिया वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
