एनएसए अजित डोभाल ने साझा किया करियर के शुरुआती दौर का कठिन अनुभव | national security news
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल ने अपने जीवन के शुरुआती दिनों से जुड़ा एक ऐसा किस्सा साझा किया है, जिसने उनकी पेशेवर जिंदगी की दिशा बदल दी। आईआईटी रुड़की के दीक्षांत समारोह में बोलते हुए उन्होंने बताया कि जब वह करीब 20 साल के थे और सिक्किम में खुफिया जिम्मेदारी संभाल रहे थे, तब उनके सामने एक बेहद चुनौतीपूर्ण स्थिति आ गई थी। सीमा पार भेजी गई उनकी एक टीम कई दिनों तक वापस नहीं लौटी, जिससे उनकी मुश्किलें बढ़ गईं [national security news]
चीनी सेना द्वारा टीम को हिरासत में लेना
डोभाल द्वारा भेजी गई खुफिया टीम निर्धारित आठ दिनों की बजाय पंद्रह दिनों तक नहीं लौटी। बाद में यह बात सामने आई कि उस टीम को चीनी सेना ने पकड़ लिया था। इस घटना के बाद डोभाल को लगा कि उनका करियर शुरुआती दौर में ही समाप्त हो जाएगा। मामले की जांच शुरू हुई और वह मानसिक रूप से काफी तनाव में आ गए। हालांकि, बाद में जांच में स्पष्ट हुआ कि मुख्यालय से जो नक्शे और स्केच उपलब्ध कराए गए थे, उनमें ही तकनीकी खामियां थीं, जिसके कारण उनकी कोई सीधी गलती नहीं पाई गई।
तिब्बती शेरपा की सीख और उसका प्रभाव
इस कठिन दौर में एक पुराने तिब्बती शेरपा ने उन्हें नक्शा पढ़ने और जीवन को देखने का एक नया नजरिया दिया। शेरपा ने उन्हें समझाया कि जीवन में हमेशा तीन बातें स्पष्ट होनी चाहिए- आप अभी कहां खड़े हैं, आपको कहां जाना है और वहां तक पहुंचने का सही रास्ता क्या है। यह सीख डोभाल के लिए जीवनभर का मार्गदर्शन बन गई, जो आज भी युवा पीढ़ी के लिए एक बड़ी प्रेरणा है।
