डीएसयू चुनाव में कंडक्टर के बेटे दीपांशु शोकीन ने रचा इतिहास | delhi university election
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव के परिणाम इस बार बेहद चौंकाने वाले रहे हैं। पारंपरिक राजनीतिक दलों और उनकी भारी-भरकम गाड़ियों के काफिले को पछाड़ते हुए एक ऐसे छात्र नेता ने जीत हासिल की है, जिसकी पृष्ठभूमि बेहद साधारण है [delhi university election]। मूल रूप से दिल्ली के पीरागढ़ी के रहने वाले और डीटीसी के एक संविदा कंडक्टर के बेटे दीपांशु शोकीन ने वाइस प्रेसिडेंट पद पर कब्जा जमाकर सबको हैरान कर दिया है। शहीद भगत सिंह कॉलेज से पढ़ाई करने वाले दीपांशु वर्तमान में बुद्धिस्ट स्टडीज से पोस्ट ग्रेजुएशन कर रहे हैं।
दीपांशु के संघर्ष की कहानी काफी प्रेरणादायक रही है। कैंपस के पास एक पीजी में हुए हादसे के बाद उन्होंने छात्रों की सुरक्षा और मनमाने शुल्कों के खिलाफ महीनों तक नंगे पैर रहकर विरोध प्रदर्शन किया था। उनका यह जमीनी संघर्ष ही छात्रों के बीच उनकी सबसे बड़ी पहचान बन गया। पिछले चार वर्षों से सक्रिय राजनीति में रहने के बावजूद उन्हें आखिरी वक्त पर पार्टी के भीतर राजनीतिक खींचतान के चलते टिकट से वंचित होना पड़ा था।
पार्टी द्वारा टिकट काटे जाने के बाद भी दीपांशु ने हार नहीं मानी और आम छात्रों के समर्थन को अपनी ताकत बनाया। बिना किसी बड़े बजट या पार्टी सिंबल के उन्होंने चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। यह परिणाम इस बात का प्रमाण है कि यदि नीयत साफ हो और संघर्ष जनता के बीच का हो, तो संसाधनों की कमी के बावजूद बड़ी से बड़ी राजनीतिक मशीनरी को हराया जा सकता है। इस ऐतिहासिक जीत से देश भर के युवाओं में सकारात्मक संदेश गया है कि छात्र राजनीति में भी बदलाव संभव है [delhi university election]।
