एनएसए अजीत डोभाल ने सुनाया 50 साल पुराना किस्सा, चीनी सेना ने पकड़ ली थी खुफिया टीम | national security news
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने हाल ही में आईआईटी रुड़की के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए अपने शुरुआती करियर के दिनों का एक ऐसा वाकया साझा किया, जिसने सभी का ध्यान खींचा। अपने जीवन के उस दौर को याद करते हुए जब वे बेहद युवा आईपीएस अधिकारी थे, उन्होंने बताया कि किस तरह सिक्किम में तैनाती के दौरान उनके सामने एक बड़ी चुनौती आ खड़ी हुई थी [national security news]। उस समय सिक्किम भारत का पूर्ण हिस्सा बनने की प्रक्रिया में था और सीमाई इलाकों की निगरानी की जिम्मेदारी उनके कंधों पर थी।
उन्होंने बताया कि सीमावर्ती क्षेत्र में भेजी गई एक खुफिया टीम तय समय पर वापस नहीं लौटी। पांच और दस दिन बीत जाने के बाद जब कोई सुराग नहीं मिला, तो उनके वरिष्ठ अधिकारियों ने फोन कर सूचना दी कि वह टीम चीनी सेना (PLA) की हिरासत में फंस गई थी। हालांकि बाद में पूछताछ के बाद चीनी सेना ने उन्हें छोड़ दिया, लेकिन वे पूरी तरह टूट चुके थे। अजीत डोभाल को लगा कि उनका करियर अब समाप्त हो जाएगा, क्योंकि इस घटना को एक बड़ी पेशेवर चूक माना जा रहा था। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि गलती उनकी नहीं बल्कि मुख्यालय से मिले नक्शों और स्केच में तकनीकी खामियों की थी।
इस निराशा के दौर में उनके साथ काम करने वाले एक बुजुर्ग तिब्बती शेरपा ने उन्हें जीवन का एक ऐसा दर्शन दिया जिसने उनका नजरिया बदल दिया। शेरपा ने समझाया कि जिंदगी और कुछ नहीं बल्कि नक्शा पढ़ने का खेल है, जहां सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि आप अपनी स्थिति, गंतव्य और रास्ते को कितनी स्पष्टता से समझते हैं। इस तरह की घटनाएं देश की सुरक्षा व्यवस्था और सीमाई रणनीतियों के निर्माण में अनुभव के महत्व को रेखांकित करती हैं, जो आज के समय में भी नीति निर्माताओं के लिए मार्गदर्शक का काम करती हैं।
