लखनऊ में अंसल के 2747 प्लाटों की रजिस्ट्री होगी रद्द, 440 भूखंडों पर बने हैं बंगले | up crime news
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में नियमों को ताक पर रखकर किए गए निर्माण कार्यों पर प्रशासन का शिकंजा कसता जा रहा है। अंसल एपीआई की सुशांत गोल्फ सिटी परियोजना में हुए कथित फर्जीवाड़े के मामले में लखनऊ विकास प्राधिकरण ने सख्त रुख अपनाया है। प्राधिकरण ने आवास विभाग के माध्यम से शासन को एक प्रस्ताव भेजा है, जिसमें उन 2747 भूखंडों की रजिस्ट्री को पूरी तरह से निरस्त करने की मांग की गई है, जिन्हें पहले ही प्राधिकरण के पास बंधक रखा गया था। नियमों के मुताबिक बंधक संपत्तियों की खरीद-फरोख्त नहीं की जा सकती थी, लेकिन बिल्डर ने मिलीभगत कर इन्हें बेच डाला। (up crime news)
पड़ताल के दौरान यह बात सामने आई है कि इन विवादित और बंधक भूखंडों में से करीब 440 जमीनों पर लोगों ने बड़े-बड़े मकान और बंगले खड़े कर लिए हैं, जबकि 81 भूखंडों पर आंशिक निर्माण हुआ है। हालांकि, राहत की बात यह है कि अभी भी बड़ी संख्या में यानी लगभग 2954 भूखंड मौके पर पूरी तरह खाली पड़े हैं। एलडीए अब इन खाली जमीनों पर कब्जा लेने और सामूहिक वाद दायर कर कानूनी शिकंजा कसने की रणनीति तैयार कर रहा है। इस पूरी कार्रवाई का सीधा असर उन आम खरीदारों पर पड़ेगा जिन्होंने बिना पूरी जांच के इन भूखंडों में अपनी गाढ़ी कमाई लगा दी थी।
एनसीएलटी से टाउनशिप का हैंडओवर मिलने के बाद एलडीए इस मामले में अपनी कानूनी कार्रवाई को और तेज करेगा। अधिकारियों का मानना है कि डीड निरस्त होने के बाद इन जमीनों पर अवैध रूप से काबिज लोगों के स्वामित्व अधिकार स्वतः समाप्त हो जाएंगे। यदि शासन इस प्रस्ताव को हरी झंडी दे देता है, तो यह सुशांत गोल्फ सिटी प्रकरण में अब तक की सबसे बड़ी और निर्णायक कार्रवाई साबित होगी।
