यूपीआई पर शुल्क की आशंका से कानपुर के बाजारों में बढ़ा कैश लेन-देन का चलन | kanpur news
डिजिटल भुगतान की सुविधा के आदी हो चुके कानपुर के बाजारों में एक बार फिर से नकदी की चर्चा जोर पकड़ने लगी है। मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू किए जाने की खबरों के बाद से स्थानीय कारोबारियों की धड़कनें तेज हो गई हैं। दुकानदारों का मानना है कि यदि छोटे से छोटे ऑनलाइन ट्रांजेक्शन पर भी शुल्क वसूला गया, तो उनकी रोजमर्रा के कामकाज की लागत बेतहाशा बढ़ जाएगी। यही वजह है कि किराना स्टोर से लेकर चाय के ठेले तक, हर जगह अब ग्राहकों से कैश देने का आग्रह किया जाने लगा है [kanpur news].
व्यापारिक संगठनों ने इस संभावित फैसले का कड़ा विरोध करना शुरू कर दिया है। ऑल इंडिया ज्वैलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन ने साफ तौर पर कहा है कि बिक्री मूल्य और मुनाफे को एक तराजू में नहीं तोला जा सकता। आभूषण कारोबारियों का तर्क है कि सोने की ऊंची कीमतों के कारण बिल बड़ा जरूर बनता है, लेकिन उनका वास्तविक मार्जिन बेहद कम होता है। ऐसे में यूपीआई पर कोई भी अतिरिक्त प्रभार छोटे व्यापारियों की कमर तोड़ सकता है। उद्योग जगत से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि इस तरह के कदमों से डिजिटल इंडिया अभियान को भी धक्का लग सकता है और व्यापारी मजबूरन पुरानी नकदी व्यवस्था की ओर लौटने को विवश हो जाएंगे.
स्थानीय स्तर पर इसका असर साफ दिखने लगा है। नयागंज के किराना दुकानदारों से लेकर घंटाघर के छोटे चाय विक्रेताओं तक ने अब छुट्टे पैसों की जद्दोजहद के बावजूद नकद भुगतान को प्राथमिकता देनी शुरू कर दी है। मोतीझील के पास ठेला लगाने वाले छोटे दुकानदारों ने तो यूपीआई क्यूआर कोड हटाना भी शुरू कर दिया है। इस बदलाव से आम जनता को भी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है, जो अब छोटी खरीदारी के लिए भी अपने स्मार्टफोन्स पर निर्भर हो चुकी है। यदि इस मामले पर जल्द स्थिति स्पष्ट नहीं हुई, तो बाजार का वित्तीय संतुलन बिगड़ सकता है।
