यूपी की राजनीति में डॉ. रोहिणी घावरी की सक्रियता बढ़ी, ओपी राजभर से मुलाकात के बाद चर्चाएं तेज | up politics news
उत्तर प्रदेश की सियासत में इन दिनों एक नया नाम चर्चा का केंद्र बनता जा रहा है। स्विट्जरलैंड से पढ़ाई और लंबे समय बाद वतन वापसी करने वाली डॉ. रोहिणी घावरी ने राज्य में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है, जिससे राजनीतिक गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो गई है (up politics news)। रोहिणी ने हाल ही में सुभासपा अध्यक्ष और राज्य सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर से मुलाकात की है, जिसके बाद से उनके अगले विधानसभा चुनाव में किसी बड़ी राजनीतिक भूमिका निभाने की अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि, इस मुलाकात को औपचारिक बताया गया है, लेकिन इसके राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं।
अपनी वापसी के बाद से ही रोहिणी लगातार विभिन्न जिलों का दौरा कर रही हैं। उन्होंने दिल्ली से लेकर गुरुग्राम, मेरठ, लखनऊ और इंदौर तक का सफर किया है और इस दौरान लगातार वाल्मीकि समाज के लोगों से संवाद स्थापित कर रही हैं। गुरुग्राम में सफाईकर्मियों की हड़ताल के दौरान उनका समर्थन करना और लखनऊ में करणी सेना के अधिवेशन में शिरकत करना यह संकेत देता है कि वह सामाजिक और राजनीतिक जमीन तैयार करने में जुटी हैं। लखनऊ प्रवास के दौरान उन्होंने जल्द ही एक बड़े आंदोलन का ऐलान भी किया है, जिसका सीधा असर राज्य के समीकरणों पर पड़ सकता है।
इस राजनीतिक सरगर्मी के बीच रोहिणी के तेवर नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद के प्रति भी काफी आक्रामक रहे हैं। उन पर गंभीर आरोप लगाने और कानूनी लड़ाई की बात कहने के बाद से राजनीतिक माहौल गरमा गया है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि रोहिणी वाल्मीकि समाज और अन्य पिछड़े वर्गों को एकजुट करने में सफल होती हैं, तो यह आगामी चुनावों में एक नया समीकरण पैदा कर सकता है। जनता के बीच इन बदलावों का सीधा असर चुनावी हवा का रुख मोड़ने में मददगार साबित हो सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि डॉ. रोहिणी घावरी किस राजनीतिक दल के साथ मिलकर अपनी सियासी पारी की शुरुआत करती हैं।
