मायावती ने ईशान आनंद से छीनी पार्टी जिम्मेदारी, परिवारवाद को लेकर बड़ा फैसला | up politics news
बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने संगठनात्मक फेरबदल के बीच एक बड़ा और कतात्मक राजनीतिक कदम उठाया है। पार्टी के भीतर परिवारवाद के आरोपों से बचने और बाबा साहब अंबेडकर तथा कांशीराम के मिशन को प्राथमिकता देते हुए उन्होंने अपने छोटे भतीजे ईशान आनंद से मुख्य सेक्टर कोआर्डिनेटर की जिम्मेदारी महज छह दिन के भीतर ही वापस ले ली है [up politics news]। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब राजनीतिक गलियारों में पार्टी की आंतरिक स्थिति को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
अपने सोशल मीडिया हैंडल के जरिए स्थिति स्पष्ट करते हुए मायावती ने प्रतिज्ञा ली है कि पार्टी हित सर्वोपरि हैं और वह किसी भी कीमत पर संगठन को पारिवारिक राजनीति का अखाड़ा नहीं बनने देंगी। उन्होंने कहा कि संस्थापक कांशीराम के सिद्धांतों पर चलते हुए उन्होंने कभी अपने सगे संबंधियों को राजनीतिक लाभ के पदों पर नहीं बख्शा है। हालांकि, अपने सबसे छोटे भाई आनंद कुमार को व्यक्तिगत देखभाल और संगठनात्मक सहयोग के लिए उन्होंने साथ रखा है, लेकिन इसका फायदा उनके बेटों को नहीं मिलने दिया जाएगा।
पार्टी की भावी रणनीति पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने संकेत दिया कि यदि आनंद कुमार को भविष्य में सहायता की आवश्यकता पड़ी, तो वकालत की पढ़ाई कर रही उनकी इकलौती बेटी दीपिका आनंद को पार्टी में लाया जा सकता है। इसके अलावा, उन्होंने यह भी घोषणा की कि आगामी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब विधानसभा चुनावों में युवाओं और ‘जेन-जी’ को संगठन तथा उम्मीदवारी में 50 प्रतिशत तक की प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि अंबेडकरवादी राजनीति को मजबूती मिल सके।
