कानपुर में दिल दहला देने वाली दास्तान, माता-पिता की बीमारी और कर्ज के चलते दो मासूमों ने छोड़ी पढ़ाई | kanpur news
उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक विचलित कर देने वाली पारिवारिक त्रासदी सामने आई है, जहां अभाव और बीमारी ने दो मासूम बच्चों के भविष्य को पूरी तरह अंधकार में धकेल दिया है। पनकी निवासी अजय तिवारी और उनकी पत्नी दोनों ही गंभीर बीमारियों और दुर्घटना के कारण बिस्तर पर हैं। इस विकट परिस्थिति ने बच्चों के जीवन की दिशा ही बदल दी है।
चार महीने पहले पैतृक गांव में एक हादसे का शिकार हुए अजय तिवारी की रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट आई थी, जिसके चलते वह चलने-फिरने में असमर्थ हो गए। वहीं, उनकी पत्नी पिंकी तिवारी पहले से ही लकवा से ग्रसित हैं। लंबे इलाज के कारण परिवार की सारी जमा-पूंजी समाप्त हो गई और उन पर भारी कर्ज हो गया। इलाज का खर्च उठाने में असमर्थ परिवार को मजबूरन मरीजों को घर लाना पड़ा।
परिस्थितियों के आगे मजबूर होकर इस परिवार के दो नाबालिग बेटों ने अपनी पढ़ाई का त्याग कर दिया। बड़ा बेटा, जो कि मात्र 16 वर्ष का है, उसने हाईस्कूल की पढ़ाई छोड़कर एक स्थानीय फैक्ट्री में 12 घंटे की नौकरी करना शुरू कर दिया है, ताकि घर का चूल्हा जल सके। वहीं, 13 साल के छोटे बेटे ने किताबों से नाता तोड़कर पूरे दिन अपने बीमार माता-पिता की सेवा करने की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली है।
इस लाचारी और बेबसी के दौर में परिवार की बेटी ने जब समाज से गुहार लगाई, तो मामला सामाजिक कार्यकर्ताओं तक पहुंचा। इसके बाद नारायण मेडिकल कॉलेज ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए बेहद कम खर्च पर अजय तिवारी का इलाज शुरू किया है। इस प्रकार की घटनाएं समाज के सम्पन्न वर्ग को सोचने पर मजबूर करती हैं कि कैसे एक आपदा पूरा परिवार तबाह कर सकती है।
