Lucknow News: गृह जिले में तैनाती और मांगों को लेकर नर्सों ने दी आंदोलन की चेतावनी
स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी नर्सों की नाराजगी अब प्रशासनिक स्तर पर टकराव का रूप लेती जा रही है। राजकीय नर्सेज संघ ने अधिकारियों पर उत्पीड़न और मनमानी का गंभीर आरोप लगाया है। इस नाराजगी का मुख्य कारण लंबे समय से लंबित पड़ी मांगें हैं, जिन पर सहमति तो बन चुकी है लेकिन धरातल पर कोई आदेश जारी नहीं हुआ है। इस स्थिति से स्वास्थ्य व्यवस्था पर असर पड़ने की पूरी संभावना है, जिससे आम मरीजों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
संघ की मुख्य मांगों में चिकित्सा शिक्षा विभाग की तर्ज पर चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग की नर्सों को उनके गृह जिले में तैनाती देना शामिल है। इसके अलावा खाली पदों को प्रमोशन के माध्यम से भरना, अस्पतालों में पालनाघर की सुविधा उपलब्ध कराना और बीएससी नर्सिंग के बाद नौकरी में आईं नर्सों को एमएससी करने के लिए दो साल का शैक्षिक अवकाश दिया जाना प्रमुख मांगें हैं। संघ का कहना है कि पिछले साल हुई बैठकों में इन मुद्दों पर सहमति बनी थी, लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी शासनादेश जारी नहीं किया गया है।
महामंत्री अशोक कुमार के अनुसार, अन्य बड़े चिकित्सा संस्थानों जैसे एसजीपीजीआई, केजीएमयू और लोहिया संस्थान में नर्सिंग संवर्ग की शैक्षिक योग्यता और जिम्मेदारियां समान होने के बावजूद भत्तों में भारी अंतर है। इन विसंगतियों को दूर करने के लिए पूर्व में हुई उच्चाधिकारियों की बैठकों में सकारात्मक रुख दिखाया गया था, लेकिन प्रशासनिक लेटलतीफी के कारण मामला अटका हुआ है।
नर्सिंग संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि 22 सितंबर तक उनकी मांगों से जुड़ा शासनादेश जारी नहीं किया जाता है, तो 26 सितंबर को प्रदेश स्तरीय बैठक बुलाई जाएगी। इस बैठक में बड़े आंदोलन की रूपरेखा तय की जाएगी, जिससे प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की रफ्तार प्रभावित हो सकती है।
