कृषि निदेशालय में up agriculture news को लेकर एफपीओ प्रतिनिधियों का जोरदार धरना
आत्मनिर्भर कृषक समन्वित विकास योजना के अंतर्गत अपने लंबित अनुमोदन और वित्तीय भुगतानों को सुनिश्चित कराने की मांग को लेकर किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के प्रतिनिधियों ने मंगलवार को कृषि निदेशालय परिसर में धरना दिया। प्रदेश के विभिन्न जिलों से जुटे करीब 40 प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक और तकनीकी लेटलतीफी के कारण उनका कामकाज ठप होने की कगार पर पहुंच गया है, जिससे अंततः राज्य के किसानों की आय और कृषि विकास प्रभावित हो रहा है।
एफपीओ प्रतिनिधियों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान लगभग 500 एफपीओ का पंजीकरण तो पूरा हो चुका है, लेकिन उनका आधिकारिक अनुमोदन अब तक अटका हुआ है। इसके साथ ही, योजना के तहत धरातल पर काम करने वाली क्लस्टर बेस बिजनेस आर्गनाइजेशन संस्थाओं और एफपीओ के बकाया भुगतान भी लंबे समय से रोक दिए गए हैं। इस आर्थिक संकट के कारण संगठनों के सुचारू संचालन, क्षमता निर्माण और अन्य जमीनी गतिविधियां बुरी तरह बाधित हो रही हैं।
संगठनों ने 30 सितंबर के बाद एफपीओ पर प्रतिदिन 200 रुपये की पेनाल्टी लगाने के प्रावधान का कड़ा विरोध किया है। प्रतिनिधियों का तर्क है कि जब विलंब पूरी तरह से विभागीय और तकनीकी स्तर पर हुआ है, तो उसका आर्थिक दंड किसानों और एफपीओ पर मढ़ना पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि बुधवार तक सभी लंबित प्रकरणों का निस्तारण कर समयबद्ध प्रक्रिया लागू नहीं की गई, तो आंदोलन को व्यापक स्तर पर फैलाया जाएगा।
इस प्रदर्शन के दौरान ज्ञानेन्द्र प्रताप सिंह, धर्मेन्द्र कुमार, डॉ. अपूर्व सिंह, रीता राय और अशोक सिंह समेत कई प्रमुख प्रतिनिधि मौजूद रहे। प्रशासनिक स्तर पर इस तरह के गतिरोध से कृषि क्षेत्र की योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवालिया निशान लग रहे हैं, जिसका सीधा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।
