इलाहाबाद हाईकोर्ट का सख्त फैसला, नोएडा मजदूर आंदोलन में student news पर NSA रद्द
नोएडा में मजदूर आंदोलन के दौरान न्यूनतम वेतन और अन्य अधिकारों की मांग को लेकर मुखर हुईं छात्र नेता आकृति चौधरी पर प्रशासन द्वारा एनएसए यानी राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लगाया गया था। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस पूरी कार्रवाई को मनमाना और आधारहीन करार देते हुए कड़े शब्दों में आलोचना की है। अदालत के इस फैसले से प्रशासनिक हलकों में जवाबदेही और कानून के सही इस्तेमाल को लेकर एक बड़ा संदेश गया है, जिससे भविष्य में ऐसी कार्रवाइयों पर अंकुश लगने की उम्मीद है।
न्यायालय ने अपने विस्तृत आदेश में स्पष्ट किया कि पुलिस हिरासत और गिरफ्तारी के समय में अंतर और बिना ठोस सबूतों के किसी नागरिक की स्वतंत्रता को छीनना असंवैधानिक है। अदालत ने कहा कि अधिकारियों को अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते समय संविधान और निष्पक्षता की शपथ का पालन करना चाहिए, न कि किसी के दबाव में आकर दमनकारी रुख अपनाना चाहिए। इस मामले में पुलिस रिपोर्ट से लेकर जिला प्रशासन के स्तर तक बरती गई लापरवाही पर कोर्ट ने गहरी नाराजगी जताई है।
हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि छात्रा को पांच लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए, जिसकी भरपाई इस पूरी प्रक्रिया में शामिल तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट, थानाध्यक्ष और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों के वेतन से की जाएगी। साथ ही, इन सभी अधिकारियों के सेवा रिकॉर्ड में इस नाराजगी को दर्ज करने का निर्देश दिया गया है। इस फैसले के बाद प्रशासनिक तंत्र में इस बात की चर्चा है कि बिना सोचे-समझे कठोर कानून का इस्तेमाल अधिकारियों के लिए भारी पड़ सकता है।
