अखिलेश यादव पर नंद किशोर गुर्जर का वार: बोले राहु की महादशा में हैं सपा प्रमुख, 2027 में 27 सीटें भी मुश्किल
गाजियाबाद जिले के लोनी से भारतीय जनता पार्टी के विधायक नंद किशोर गुर्जर ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर जमकर निशाना साधा है। रक्षाबंधन के अवसर पर पुरा महादेव मंदिर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए गुर्जर ने कहा कि अखिलेश यादव की बातों पर ध्यान नहीं देना चाहिए क्योंकि उन पर राहु की महादशा चल रही है। विधायक के अनुसार, इस ग्रह दशा के प्रभाव से अखिलेश जो भी बोलेंगे, उसका विपरीत परिणाम ही होगा। उन्होंने अखिलेश यादव को अपनी इस दशा के निवारण के लिए उपाय करने की सलाह भी दी।
विधायक नंद किशोर गुर्जर ने कहा कि अखिलेश यादव 2032 तक चुप बैठने वाले नहीं हैं, क्योंकि वह राजनीति में सक्रिय हैं। उन्होंने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को लेकर भविष्यवाणी करते हुए कहा कि सपा को 27 सीटें भी मिलना मुश्किल होगा। गुर्जर ने अखिलेश यादव पर जाट-महिलाओं, ब्राह्मणों, और राजभर समाज के अपमान का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि अखिलेश यादव ने बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर को ‘भूमाफिया’ कहकर पूरे समाज को तोड़ने का काम किया है। विधायक ने चुनौती दी कि यदि अखिलेश यादव में हिम्मत है तो वे किसी मौलवी या देवबंद के किसी व्यक्ति के खिलाफ बोलकर दिखाएं। उन्होंने कहा कि पूरा सनातन समाज देख रहा है कि अखिलेश यादव हिंदुओं के दुश्मन हैं और उनका सूपड़ा साफ हो जाएगा।
नंद किशोर गुर्जर ने रालोद नेता जयंत चौधरी की भूमिका पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जयंत चौधरी ने 47 सीट वाली पार्टी (सपा) को 300 से अधिक सीटें जिताने में मदद की। गुर्जर के अनुसार, जयंत चौधरी ने अखिलेश यादव के लिए एक रुपये बनाने का काम किया है। उन्होंने कहा कि जयंत चौधरी को यह देखना चाहिए कि उनके दादा (चौधरी चरण सिंह) के कारण ही मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री बन पाए, अन्यथा वे सड़क किनारे पंचर लगा रहे होते।
विधायक ने आगे कहा कि यदि अखिलेश यादव स्वयं को सनातनी हिंदू मानते हैं और हिंदुओं का वोट चाहते हैं, तो उन्हें भगवान श्रीकृष्ण का मंदिर बनवाने की घोषणा करनी चाहिए। उन्होंने दोहराया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में सपा के लिए 27 सीटें जीतना एक बड़ी उपलब्धि होगी।
इस बीच, जयंत चौधरी ने भी बिना नाम लिए अखिलेश यादव पर कटाक्ष किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि किसी भी अपराध में पीड़ित के साथ सभ्य समाज की संवेदना होती है और उसे सहारा मिलता है। हत्या जैसे गंभीर अपराध में मृतक की जाति की तलाशना और यह कहना कि उसके जाति के लोगों में आक्रोश है, अपने आप में संवेदनहीनता है। ऐसी घड़ी में सभी विचार, जाति, क्षेत्र या अन्य भेदों से ऊपर उठकर मानवीय रिश्तों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
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