बच्चों की आंखों पर डिजिटल स्क्रीन का कहर, मायोपिया के मामले बढ़े: Aligarh News
अलीगढ़ में बच्चों की आंखों की सेहत पर डिजिटल स्क्रीन का बुरा असर पड़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग और जेएनएमसी के नेत्र रोग विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 6 से 16 वर्ष के बच्चों में दूर की नजर कमजोर होने की समस्या तेजी से बढ़ी है। स्कूलों में किए गए एक सर्वे में 48.2 प्रतिशत बच्चों में दृष्टि संबंधी दिक्कतें सामने आई हैं। विशेषज्ञ समय पर जांच और सही नंबर का चश्मा लगाने की सलाह दे रहे हैं।
मोबाइल फोन, ऑनलाइन क्लास और लगातार स्क्रीन देखने की आदत ने बच्चों की आंखों की सेहत को लेकर चिंता बढ़ा दी है। 50 से अधिक सरकारी और निजी स्कूलों में किए गए हेल्थ सर्वे में 6 से 16 वर्ष के 48.2 प्रतिशत बच्चों को दूर देखने में परेशानी होने की बात सामने आई है। मायोपिया यानी निकट दृष्टिदोष बच्चों और युवाओं में तेजी से बढ़ रहा है। राष्ट्रीय अंधत्व एवं दृष्टिहीनता नियंत्रण कार्यक्रम के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश स्तर पर भी स्थिति चिंताजनक है, जहां करीब 1.20 करोड़ बच्चों और युवाओं को चश्मे की जरूरत है, लेकिन केवल 35 प्रतिशत ही समय पर चश्मा बनवा पाते हैं।
एक अध्ययन में 5 से 6 घंटे ऑनलाइन पढ़ाई और रील्स देखने वाले 72 प्रतिशत युवाओं में डिजिटल आई स्ट्रेन के लक्षण पाए गए हैं, जिनमें आंखों में सूखापन, सिरदर्द और धुंधलापन शामिल हैं। युवाओं में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के प्रभाव के कारण बिना जांच के ऑनलाइन सस्ते कंप्यूटर ग्लास और ब्लू-कट चश्मे खरीदने का चलन बढ़ा है। नेत्र रोग विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बिना आंखों की जांच के चश्मा खरीदना उचित नहीं है, क्योंकि लेंस का ऑप्टिकल सेंटर और पुतली का अलाइनमेंट सही होना जरूरी है। फैशन या कम कीमत के बजाय आंखों की जांच और विशेषज्ञ की सलाह को प्राथमिकता देनी चाहिए।
डिजिटल स्क्रीन का इस्तेमाल करने वालों के लिए डॉक्टरों ने 20-20-20 नियम अपनाने की सलाह दी है। इसके तहत हर 20 मिनट के स्क्रीन इस्तेमाल के बाद 20 सेकंड तक कम से कम 20 फीट दूर की वस्तु को देखना चाहिए। साथ ही पलकें बार-बार झपकाते रहना भी जरूरी है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह नियम लंबे समय तक स्क्रीन देखने से होने वाले तनाव और आंखों के सूखेपन को कम करने में मदद कर सकता है। चश्मे का नंबर होने पर नियमित नेत्र जांच कराना भी आवश्यक है। इस समस्या का सीधा असर बच्चों की शिक्षा और दैनिक जीवन पर पड़ रहा है, जिससे उनकी एकाग्रता और सीखने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
