आगरा के 85 निजी अस्पतालों पर गिरी गाज: ICU में डॉक्टर नहीं, ऑपरेशन थिएटर में गंदगी, 60% फेल
आगरा में निजी अस्पतालों की लापरवाही का चौंकाने वाला सच सामने आया है। स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा किए गए निरीक्षण में 140 में से 85 निजी अस्पतालों (लगभग 60%) में गंभीर खामियां पाई गई हैं। इन अस्पतालों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। निरीक्षण के दौरान गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में डॉक्टरों की अनुपस्थिति, अप्रशिक्षित स्टाफ, ऑपरेशन थिएटर और वार्डों में गंदगी, तथा बायोमेडिकल कचरे के अनुचित निपटान जैसी अनियमितताएं उजागर हुईं।
अस्पतालों में मानकों का घोर उल्लंघन
स्वास्थ्य विभाग की पांच टीमों ने शहर के 496 निजी अस्पतालों में से पहले चरण में 140 का निरीक्षण किया। जांच में सामने आया कि कई अस्पतालों के आईसीयू में गंभीर रूप से बीमार मरीजों का इलाज करने वाले डॉक्टर मौजूद नहीं थे। कुछ जगहों पर बीएएमएस डिग्री धारक आयुर्वेदिक चिकित्सक एलोपैथिक इलाज करते पाए गए, जो नियमों के विरुद्ध है। इसके अलावा, कई अस्पतालों के संचालकों के पास पंजीकरण संबंधी आवश्यक दस्तावेज भी नहीं थे। ऑपरेशन थिएटरों में साफ-सफाई का अभाव और बायोमेडिकल कचरे का बिखरा होना चिंताजनक था। अग्निशमन विभाग, नगर निगम और अन्य आवश्यक प्राधिकरणों से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) का न होना भी एक बड़ी कमी पाई गई।
कार्रवाई की चेतावनी
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि जिन 85 अस्पतालों को नोटिस जारी किया गया है, यदि वे संतोषजनक जवाब नहीं देते हैं तो उन्हें मरीज भर्ती करने से रोका जाएगा और पंजीकरण रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। कुछ अस्पतालों के पंजीकरण पर रोक लगा दी गई है क्योंकि वे आवासीय कॉलोनियों में संचालित हो रहे थे, जिसके संबंध में शासन से दिशा-निर्देश मांगे गए हैं। यह स्थिति शहर के स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करती है, क्योंकि मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वाले ऐसे अस्पतालों पर तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है।
