उत्तर प्रदेश में हर चौथा वयस्क उच्च रक्तचाप से पीड़ित, न्यूरोलॉजिस्ट ने जताई चिंता
घंटों कुर्सी पर बैठकर काम करना, बाजार का खानपान, बढ़ता तनाव और व्यायाम की कमी युवाओं को गंभीर बीमारियों की ओर धकेल रही है। मेदांता अस्पताल लखनऊ में आयोजित मेदांता न्यूरो कॉन्क्लेव में न्यूरोलॉजी विभाग के डायरेक्टर डॉ. अनूप कुमार ठक्कर ने चिंता जताई कि प्रदेश का हर चौथा वयस्क उच्च रक्तचाप से पीड़ित है। इस कारण युवाओं में ब्रेन स्ट्रोक, कमर, गर्दन, रीढ़ की हड्डी जैसी न्यूरो से जुड़ी बीमारियों में तेजी से वृद्धि देखी जा रही है।
डॉ. ठक्कर ने बताया कि लगभग 80% स्ट्रोक को जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव, नियमित स्वास्थ्य जांच और समय पर उचित इलाज से रोका जा सकता है। मेदांता के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. राकेश कपूर ने इस बात पर प्रकाश डाला कि न्यूरोलॉजिकल बीमारियां अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि युवा पीढ़ी भी इनकी चपेट में आ रही है। उन्होंने युवाओं से ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल के स्तर पर विशेष सतर्कता बरतने और नियमित जांच कराने का आग्रह किया।
न्यूरो सर्जरी विभाग के डायरेक्टर डॉ. रवि शंकर और डॉ. कमलेश सिंह भैसोरा ने ब्रेन स्ट्रोक के शुरुआती लक्षणों को पहचानने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शरीर के एक हिस्से में अचानक कमजोरी आना, जुबान का लड़खड़ाना, असहनीय सिरदर्द या चलते समय संतुलन खोना, ये सभी ब्रेन स्ट्रोक के गंभीर संकेत हो सकते हैं और ऐसे में तत्काल न्यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए। डॉ. रतीश जुयाल और डॉ. रोहित अग्रवाल ने जटिल न्यूरोलॉजिकल रोगों के निदान, आधुनिक न्यूरो इमेजिंग तकनीकों, स्ट्रोक प्रबंधन, मस्तिष्क और तंत्रिका संबंधी विकारों, मिर्गी, मूवमेंट डिसऑर्डर और नवीनतम शल्य चिकित्सा विधियों पर अपने अनुभव साझा किए।
इस गंभीर स्वास्थ्य समस्या को देखते हुए, नियमित रूप से ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच कराना अत्यंत आवश्यक है। इन बीमारियों का समय पर पता लगने से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है और स्वस्थ जीवन जिया जा सकता है।
