कानपुर: महिला कैदी का 35 दिन चला गुपचुप इलाज, EMO पर लापरवाही का आरोप, Kanpur news
कानपुर के उर्सला अस्पताल में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर (EMO) ने एक महिला कैदी का 35 दिनों तक गुपचुप तरीके से इलाज किया। इस दौरान न तो अस्पताल के निदेशक को सूचना दी गई और न ही किसी विशेषज्ञ चिकित्सक से इलाज कराया गया। यह मामला तब खुला जब जेल अधीक्षक ने महिला कैदी के स्वास्थ्य की जानकारी मांगी।
अस्पताल प्रबंधन से छिपाई गई जानकारी
जानकारी के अनुसार, पेट में तेज दर्द की शिकायत पर दो जुलाई को एक विचाराधीन महिला कैदी अनुजा अवस्थी को उर्सला अस्पताल लाया गया था। EMO डॉ. सपन गुप्ता ने कैदी को भर्ती कर लिया और उसे एक प्राइवेट कमरे में रखकर खुद ही इलाज शुरू कर दिया। उन्होंने इस भर्ती की जानकारी अस्पताल के निदेशक और प्रबंधन को नहीं दी।
जेल अधीक्षक के पत्र से हुआ खुलासा
चार अगस्त को जेल अधीक्षक ने अस्पताल निदेशक को पत्र भेजकर कैदी के स्वास्थ्य की जानकारी मांगी और स्वस्थ होने पर उसे डिस्चार्ज करने का अनुरोध किया। इस पत्र के बाद ही महीने भर से अधिक समय से चल रहे इस गुप्त इलाज का खुलासा हुआ। निदेशक ने तुरंत कैदी की जांच कराई और स्वस्थ पाए जाने पर उसे अगले दिन जेल भेज दिया गया।
निदेशक ने माना गंभीर लापरवाही
उर्सला की निदेशक डॉ. सीमा श्रीवास्तव ने बिना सूचना के कैदी का इलाज करने और विशेषज्ञ से परामर्श न कराने को गंभीर लापरवाही माना है। उन्होंने कहा कि EMO ने यह जानकारी इतने दिनों तक क्यों छिपाई, इसकी जांच की जा रही है। वहीं, EMO डॉ. सपन गुप्ता का कहना है कि वह निदेशक या प्रबंधन को सूचना देना भूल गए थे, जिसे वह बड़ी त्रुटि मानते हैं।
कैदी पर दर्ज हैं कई मामले
विचाराधीन महिला कैदी अनुजा अवस्थी पर एससी-एसटी एक्ट सहित धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं के तहत कई मामले दर्ज हैं। जेल अधीक्षक ने पत्र में कैदी को न्यायालय में पेश न कर पाने की समस्या का भी उल्लेख किया था। इस घटना ने अस्पताल की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
