कानपुर पुलिस की ग्रीन कॉरिडोर व्यवस्था: 65 जिंदगियों को बचाया, 10 मिनट की देरी से मौत का मुंह देखते मरीजों को मिला जीवन
कानपुर कमिश्नरेट पुलिस की ‘ग्रीन कॉरिडोर’ व्यवस्था अब तक 65 जिंदगियां बचा चुकी है। यह पहल उन मरीजों के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही है, जो ट्रैफिक जाम में फंसने के कारण समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाते और अपनी जान गंवा देते हैं। यह व्यवस्था विशेष रूप से उन गंभीर मरीजों के लिए है, जिन्हें अस्पताल पहुंचने में कुछ मिनटों की देरी भी भारी पड़ सकती है।
ग्रीन कॉरिडोर का उद्देश्य और प्रभाव
अप्रैल 2023 में शुरू की गई इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य एंबुलेंस को बिना किसी रुकावट के कम से कम समय में अस्पताल तक पहुंचाना है। अपर पुलिस आयुक्त कानून एवं व्यवस्था, विपिन ताडा के अनुसार, इस पहल से अब तक कानपुर के 60 और आसपास के जनपदों के 5 लोगों की जान बचाई जा चुकी है। यह व्यवस्था विशेष रूप से दोपहर और शाम के व्यस्त समय में बहुत उपयोगी साबित हो रही है, जब ट्रैफिक का दबाव अधिक होता है।
दो केस स्टडीज से समझें व्यवस्था की महत्ता
पहला मामला बर्रा के एक अस्पताल में भर्ती राधा का है, जिनकी हालत गंभीर होने पर उन्हें हैलट अस्पताल ले जाना था। पुलिस सहायता नंबर पर कॉल करने के बाद, यातायात विभाग की गाड़ी ने रास्ता साफ किया और महज 20 मिनट में एंबुलेंस हैलट पहुंच गई, जिससे राधा को समय पर इलाज मिल सका और अब वे स्वस्थ हो रही हैं।
दूसरा मामला फर्रुखाबाद के एक बच्चे का है, जिसे गंभीर हालत में यशोदा नगर के एक अस्पताल से रामा मेडिकल कॉलेज ले जाया जा रहा था। रास्ते में बच्चे को दौरे पड़ने लगे। आनन-फानन में ग्रीन कॉरिडोर बनाकर बच्चे को समय पर कॉलेज पहुंचाया गया, जहां इलाज के बाद उसकी हालत में सुधार हुआ। वर्तमान में बच्चे का इलाज दिल्ली के चाचा नेहरू अस्पताल में चल रहा है।
24 घंटे उपलब्ध है मदद
ग्रीन कॉरिडोर व्यवस्था के लिए दो एंबुलेंस चालकों, सत्यप्रकाश उर्फ पिंटू और गौरव तिवारी को 24 घंटे तैनात रखा गया है। किसी भी आपात स्थिति में मदद के लिए कमिश्नरेट पुलिस ने हेल्पलाइन नंबर 9454402413 जारी किया है, जिसकी जिम्मेदारी एक इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी को सौंपी गई है। यह व्यवस्था शहरवासियों के लिए एक बड़ी सुरक्षा कवच के रूप में कार्य कर रही है।
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