आग लगने पर फायर और बिजली विभाग होंगे जिम्मेदार, नई SOP से तय होगी जवाबदेही
अलीगंज अग्निकांड के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने आग की घटनाओं से निपटने के लिए एक नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार की है। इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य आग लगने की घटनाओं के लिए जिम्मेदार विभागों की जवाबदेही तय करना है। अब किसी भी भवन में अग्नि सुरक्षा से जुड़ी चूक पाए जाने पर सबसे पहले अग्निशमन विभाग और बिजली विभाग की भूमिका की जांच की जाएगी। एसआईटी की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकांश बड़ी आग की घटनाएं विद्युत खामियों और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण होती हैं, इसलिए इन दोनों विभागों को सबसे अहम माना गया है।
नई एसओपी के तहत अग्निशमन विभाग को केवल आग बुझाने वाली एजेंसी के बजाय अग्नि सुरक्षा का मुख्य नियामक बनाया गया है। विभाग को अब भवनों का नियमित निरीक्षण करना, अग्नि सुरक्षा अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) जारी करना, सुरक्षा मानकों का सत्यापन करना, जन जागरूकता अभियान चलाना और आपातकालीन स्थिति में तुरंत कार्रवाई करना अनिवार्य होगा। यदि किसी भवन में सुरक्षा उपकरण निष्क्रिय पाए जाते हैं या नियमों का उल्लंघन होता है, तो कार्रवाई की जिम्मेदारी भी अग्निशमन विभाग की होगी।
बढ़ते शहरीकरण और बिजली की बढ़ती खपत को देखते हुए, उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन (यूपीपीसीएल) को सुरक्षित विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करनी होगी। उन्हें स्वीकृत विद्युत भार पर निगरानी रखनी होगी और अवैध लोड की पहचान करनी होगी। इसके साथ ही, विद्युत सुरक्षा निदेशालय वायरिंग, ट्रांसफार्मर, विद्युत प्रतिष्ठानों और अन्य उपकरणों का निरीक्षण करेगा और विद्युत दुर्घटनाओं की जांच भी करेगा।
विकास प्राधिकरणों को यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है कि भवन स्वीकृत मानचित्र और भूमि उपयोग के अनुरूप ही संचालित हों। अनधिकृत निर्माण, बेसमेंट के गलत इस्तेमाल और भवनों में अवैध बदलाव पर भी प्राधिकरणों की नजर रहेगी। जहां गंभीर समस्याएं पाई जाएंगी, वहां संयुक्त टीम मौके पर जाकर निरीक्षण करेगी और खामियों को दूर कराएगी। नगर निगम और अन्य स्थानीय निकायों को लाइसेंस, व्यापारिक प्रतिष्ठानों के अभिलेख और स्थानीय नियमों के पालन की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इस नई व्यवस्था के तहत सभी विभागों को एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा। इससे किसी भी भवन की एनओसी, बिजली कनेक्शन, मानचित्र स्वीकृति और लाइसेंस से जुड़ी सारी जानकारी एक ही मंच पर उपलब्ध होगी। किसी भी स्तर पर गड़बड़ी मिलने पर संबंधित विभाग की जवाबदेही स्वतः तय हो जाएगी। यह जीआईएस आधारित बिल्डिंग सेफ्टी रिपोजिटरी के रूप में काम करेगा, जिसमें भवनों में रहने वाले लोगों का डेटा भी दर्ज रहेगा। इस नई एसओपी से विकास प्राधिकरणों के अधिकारियों को बड़ी राहत मिलेगी, क्योंकि अब आग की घटनाओं में लेसा और फायर विभाग के अधिकारियों की भी सीधी जवाबदेही तय होगी।
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