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कानपुर के जर्जर स्कूलों में बच्चों की जान खतरे में, प्रशासन बेफिक्र

By Jul 14, 2026

कानपुर के रसूलाबाद और सरवनखेड़ा इलाकों में कई प्राथमिक विद्यालय जर्जर भवनों में संचालित हो रहे हैं, जिससे बच्चों की जान जोखिम में है। भले ही कुछ जर्जर भवनों को गिरा दिया गया हो, लेकिन जहां वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है, वहां बच्चे खतरनाक इमारतों में ही पढ़ाई कर रहे हैं। इन स्कूलों के किचन और शौचालयों की हालत भी चिंताजनक है, जिनका बच्चे नियमित रूप से उपयोग करते हैं। हाल ही में की गई पड़ताल में कई स्कूलों में ऐसी ही स्थिति पाई गई है।

लालाभगत स्कूल की जर्जर छत और किचन

रसूलाबाद ब्लॉक के लालाभगत गांव में प्राइमरी स्कूल का एक भवन गिरा दिया गया है, लेकिन शेष एकल कक्ष में बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। इस कक्ष की छत भी जर्जर है, जिससे बरसात में पानी टपकता है और प्लास्टर गिरता है। पांच साल पहले आकाशीय बिजली गिरने से छत धंस गई थी, जिससे सरिया पूरी तरह खुल गई हैं। स्कूल में 55 बच्चे पंजीकृत हैं और किचन की छत भी जर्जर हालत में है। प्रधानाध्यापक ने इसकी सूचना बीआरसी को दे दी है।

केवलेपुर और धुसरामऊ में भी खतरा

केवलेपुर प्राइमरी स्कूल का भवन भी जर्जर है और बच्चों की जान खतरे में है। यह स्कूल जर्जर भवनों की सूची में शामिल है, लेकिन यहां बच्चों की सुरक्षा को लेकर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। पुट्टी और पुताई से इसे ठीक दिखाने की कोशिश की गई है, लेकिन खतरा बना हुआ है। इसी तरह धुसरामऊ प्राइमरी स्कूल का भवन भी अत्यंत जर्जर है। छह महीने पहले शिक्षकों ने अधिकारियों को सूचित किया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

पतरा सड़वा और कुर्वाखुर्द में शौचालय और स्टोर रूम की हालत खराब

पतरा सड़वा स्कूल में शौचालय जर्जर है, जिसका बच्चे उपयोग करते हैं। भवन के पास बना किचन स्टोर की सरिया नीचे से दिखाई दे रही है। इसके बावजूद बच्चों का आवागमन जारी है। ब्लॉक में कई स्कूलों के किचन और शौचालय पर ध्यान नहीं दिया गया है, जिससे बरसात के समय खतरा बढ़ जाता है। शिक्षकों के अनुसार, विभाग द्वारा पहले ही सर्वे कराया जा चुका है और अधिकारियों को पूरी जानकारी है। पूर्व माध्यमिक विद्यालय कुर्वाखुर्द में भी एकल कक्ष जर्जर है, जिससे बच्चों के लिए हर वक्त खतरा मंडरा रहा है। किचन शेड और स्टोर रूम में बारिश में पानी टपकता है, और बच्चे इन परिसरों में खेलते हैं, जिससे उनकी जान जोखिम में है। जिम्मेदार अधिकारियों की जानकारी में होने के बावजूद इन खतरों को दूर नहीं किया जा रहा है।

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