आगरा जूता निर्यात पर वैश्विक संकट का साया, नए सीजन के ऑर्डर पर भी मंडराया खतरा
आगरा के जूता निर्यातकों के लिए वैश्विक संकटों का दौर जारी है। रूस-यूक्रेन युद्ध, अमेरिकी टैरिफ और पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता ने उद्योग के सामने गंभीर चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। इन वैश्विक घटनाओं के कारण न केवल सर्दियों के सीजन के ऑर्डर प्रभावित हुए हैं, बल्कि अगले वर्ष की गर्मियों के लिए भी नए ऑर्डर मिलने की राह मुश्किल नजर आ रही है।
वैश्विक संकटों का असर आगरा के जूता निर्यात पर साफ दिख रहा है। सर्दियों के सीजन में निर्यात में भारी गिरावट देखी गई है, और अब जून में इटली में हुए गार्डा फेयर में भी खरीदारों की प्रतिक्रिया ठंडी रही। खरीदारों की ओर से मिले कमजोर संकेतों से निर्यातकों की चिंताएं बढ़ गई हैं। आगरा से सालाना लगभग 4500 करोड़ रुपये के चमड़े के जूतों का निर्यात होता है, जिसमें इस शहर की करीब 28 प्रतिशत हिस्सेदारी है। लगभग 150 इकाइयां इस निर्यात व्यवसाय से जुड़ी हुई हैं।
पश्चिम एशिया में चार महीने से अधिक समय से चल रहे युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों के आवागमन पर लगे प्रतिबंधों ने कारोबार को और प्रभावित किया है। युद्ध के कारण पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में वृद्धि हुई है, जिससे यूरोप में ऊर्जा और परिवहन लागत बढ़ गई है। इसका सीधा असर वहां के उपभोक्ता बाजार पर पड़ा है, जहां कपड़े और जूतों जैसी गैर-जरूरी वस्तुओं की मांग में कमी आई है।
एफमेक के राजेश सहगल के अनुसार, यूरोप में विंटर शू का निर्यात 30-40 प्रतिशत तक कम हुआ है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से हालात लगातार बिगड़े हैं और जूता निर्यातक उत्पादन में कटौती कर रहे हैं। यूरोप, जो आगरा के जूता निर्यात का 70 प्रतिशत हिस्सा खरीदता था, वहां सप्लाई में भारी कमी आई है। अमेरिका, जो दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है, वहां टैरिफ ने बाजार को प्रभावित किया था, हालांकि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कुछ सुधार की उम्मीद है। आगामी गर्मी के सीजन के लिए जुलाई से शुरू होने वाली प्रारंभिक बातचीत भी युद्ध के कारण खरीदारों से अच्छे संकेत नहीं दे पा रही है। इटली में गार्डा फेयर में खरीदारों की कम संख्या और पूछताछ में कमी ने भविष्य की अनिश्चितता को और बढ़ा दिया है।
