हाईकोर्ट की टिप्पणी से प्रधानों की प्रशासक की कुर्सी खतरे में, ब्लॉक प्रमुखों के भी उड़े होश
कानपुर देहात में पंचायती राज व्यवस्था में एक बड़ा मोड़ आ गया है। कार्यकाल समाप्त होने के बाद सरकार द्वारा प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने के आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अवैधानिक करार दिया है। इस फैसले से न केवल प्रधानों की प्रशासक के तौर पर सत्ता पर प्रश्नचिन्ह लग गया है, बल्कि भविष्य में प्रशासक बनने की आस लगाए ब्लॉक प्रमुखों और जिला पंचायत अध्यक्षों के माथे पर भी चिंता की लकीरें उभर आई हैं।
यह निर्णय उन प्रधानों के लिए बड़ा झटका है, जिन्हें कार्यकाल खत्म होने के बाद प्रशासक बनाकर सत्ता में बने रहने की उम्मीद थी। सरकार के आदेश के बाद खुशी में मिठाई बांटने वाले प्रधानों के अरमानों पर पानी फिरता दिख रहा है। वहीं, इस निर्णय से चुनावी मैदान में उतरने वाले अन्य दावेदारों को भी राहत मिली है, क्योंकि अब प्रधान भी सामान्य दावेदार की तरह ही चुनाव लड़ेंगे।
इस बीच, ब्लॉक प्रमुखों और जिला पंचायत अध्यक्षों की चिंताएं भी बढ़ गई हैं। उन्हें भी जुलाई के बाद प्रशासक बनने का अवसर मिलने की उम्मीद थी, जो अब धूमिल होती दिख रही है। इस अनिश्चितता के चलते, वे भी बचे हुए कार्यों को जल्द से जल्द निपटाने की कोशिश में जुट गए हैं। सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश का अध्ययन करने के बाद आगे की रणनीति तय करने की बात कही है, तब तक प्रशासक प्रधान अपनी कुर्सी को सुरक्षित मान रहे हैं।
