आगरा फोर्ट में मनेगा महाराजा सूरजमल का विजय उत्सव, जानें इतिहास
मुगल बादशाह अकबर द्वारा निर्मित आगरा के ऐतिहासिक किले में जल्द ही भरतपुर के वीर शासक महाराजा सूरजमल की विजय का उत्सव मनाया जाएगा। यह कार्यक्रम 12 जून को आयोजित होने की संभावना है, जिसके लिए जिला पर्यटन और संस्कृति परिषद ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से अनुमति मांगी है। यह आयोजन महाराजा सूरजमल के 1761 में 40 दिन की घेराबंदी के बाद आगरा किले पर प्राप्त की गई ऐतिहासिक जीत की स्मृति में होगा।
महाराजा सूरजमल के सेनानायक बलराम के नेतृत्व में आई सेना ने किलेदार के कड़े प्रतिरोध का सामना किया था। महाराजा सूरजमल के स्वयं आगरा आगमन के बाद, किले के रक्षकों के परिजनों को बंधक बनाने जैसी रणनीतियों के चलते किले पर उनका अधिकार स्थापित हुआ। 12 जून, 1761 को किले पर महाराजा सूरजमल का ध्वज फहराया गया, और उन्हें बड़ी मात्रा में धन-संपत्ति और गोला-बारूद प्राप्त हुआ, जिसे भरतपुर और डीग के किलों में भिजवाया गया।
इस विजय के बाद आगरा लगभग 1774 तक भरतपुर रियासत के अधीन रहा। इस काल के कई ऐतिहासिक प्रमाण आगरा में आज भी मौजूद हैं, जैसे कि रतन सिंह की हवेली, जो ASI द्वारा पर्यटकों के लिए बंद रखी गई है। महाराजा सूरजमल, भरतपुर रियासत के संस्थापक थे और उनके शासनकाल में एक विशाल क्षेत्र शामिल था। उनके नाम पर आगरा में कई स्थानों और संस्थानों का नामकरण भी हुआ है, जो उनके ऐतिहासिक महत्व को दर्शाता है।
यह उत्सव न केवल महाराजा सूरजमल की वीरता का सम्मान करेगा, बल्कि आगरा के समृद्ध इतिहास और विभिन्न शासकों के योगदान को भी उजागर करेगा। यह आयोजन शहर के नागरिकों और पर्यटकों को इतिहास से जुड़ने का एक अनूठा अवसर प्रदान करेगा।
