जमीन विवादों पर सीएम योगी सख्त, अफसरों की जवाबदेही तय होगी, UP land dispute
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य में जमीन-जायदाद से जुड़े राजस्व के लंबित मामलों पर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि राजस्व मामलों के त्वरित, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि भूमि और राजस्व से जुड़े विवाद आमजन, किसान हितों और सामाजिक सौहार्द से सीधे जुड़े होते हैं, इसलिए इन मामलों में किसी भी प्रकार का विलंब स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्धारित समय-सीमा के बाद भी लंबित रहने वाले मामलों में संबंधित अधिकारियों और कार्मिकों की जवाबदेही तय की जाएगी और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने राजस्व न्यायालयों में लंबित वादों के निस्तारण की प्रगति की उच्चस्तरीय समीक्षा करते हुए कहा कि तकनीक आधारित व्यवस्था, जवाबदेही और समयबद्ध कार्यप्रणाली से राजस्व न्यायालयों की कार्यक्षमता को और अधिक प्रभावी बनाया जाना चाहिए, ताकि आम नागरिक को शीघ्र न्याय मिल सके। उन्होंने विशेष रूप से निर्देश दिए कि निर्धारित समय-सीमा से अधिक अवधि से लंबित वादों का अभियान चलाकर प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जाए। तहसील और जनपद स्तर पर नियमित समीक्षा हो तथा कमजोर प्रदर्शन करने वाले जिलों की जवाबदेही तय की जाए। मुख्यमंत्री ने जोर दिया कि राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली केवल आंकड़ों तक सीमित न रहकर आमजन को वास्तविक राहत प्रदान करे।
समीक्षा में आरसीसीएमएस पोर्टल के माध्यम से धारा-80 के अंतर्गत लंबित वादों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। हालांकि, कुछ जिलों जैसे मेरठ, वाराणसी, अमेठी, गौतमबुद्धनगर और हापुड़ का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर पाया गया, जबकि बस्ती, चित्रकूट, अयोध्या, बागपत और कन्नौज ने बेहतर प्रदर्शन किया। इसी तरह, धारा-34 के अंतर्गत लंबित वादों की संख्या में भी कमी आई है, लेकिन गोरखपुर, संतकबीरनगर, प्रतापगढ़, बलिया और देवरिया अपेक्षित प्रगति नहीं कर सके। मुख्यमंत्री ने इन जिलों में विशेष अभियान चलाकर लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने वरासत से जुड़े मामलों में नागरिकों को अनावश्यक परेशानी न हो, यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। धारा-24 के मामलों की समीक्षा में भी कुछ जिलों जैसे गौतमबुद्धनगर, लखनऊ, प्रतापगढ़, अमेठी और मुजफ्फरनगर की प्रगति संतोषजनक नहीं पाई गई। मुख्यमंत्री ने ऐसे जिलों में वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि राजस्व न्यायालयों में वर्षों से लंबित पुराने मामलों की अलग सूची तैयार कर उनके निस्तारण के लिए विशेष रणनीति बनाई जाए। मुख्यमंत्री ने सभी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र में लंबित वादों का एक समय सीमा तय करके निस्तारण कराने के निर्देश दिए, ताकि जनता का विश्वास और अधिक मजबूत हो।
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