गाजीपुर हिंसा: अखिलेश यादव ने योगी सरकार से पूछे 5 सवाल, PDA समुदाय में बढ़ा गुस्सा
गाजीपुर के करंडा थाना क्षेत्र के कटारिया गांव में हुई घटना को लेकर राजनीति तेज हो गई है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि बयान बदलने से सच्चाई नहीं बदल जाती। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार पीड़ितों पर दबाव बनाकर सच्चाई छिपाने की कोशिश कर रही है। अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए इसे अब तक का सबसे कमजोर शासन बताया। उन्होंने इस मामले में पांच अहम सवाल उठाए हैं, जिनमें एफआईआर दर्ज करने में देरी, बयान क्यों बदले गए, पीड़ित परिवार को और परेशान क्यों किया जा रहा है, पुलिस पर पत्थर फेंकने वाले दबंग तत्वों के खिलाफ कार्रवाई किसने रोकी, और पोस्टमार्टम पर सवालिया निशान क्यों लगा है, शामिल हैं।
अखिलेश यादव ने दावा किया कि गांव के लोगों को जमीनी सच्चाई पता है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट चाहे कुछ भी कहे, हकीकत को दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के दबाव में बयान बदलवाए जा रहे हैं, जिससे समाज में भ्रम और आक्रोश फैल रहा है। उन्होंने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम से खासकर पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समुदाय में गुस्सा बढ़ा है। उन्होंने गाजीपुर की घटना की तुलना हाथरस कांड से करते हुए कहा कि दोनों मामलों में समानता है, क्योंकि पीड़ित परिवार कमजोर वर्ग से थे और उन पर अत्याचार करने वाले प्रभावशाली लोग थे। उन्होंने इसे सामाजिक भेदभाव की जड़ से जुड़ा मामला बताया।
यह घटना 15 अप्रैल को गांव निवासी रिता विश्वकर्मा के शव के गंगा में उतराया मिलने से शुरू हुई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डूबने से मौत की पुष्टि हुई थी। युवती के परिजनों की तहरीर पर केस दर्ज कर पुलिस ने एक आरोपी हरिओम पांडेय को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। 22 अप्रैल को पीड़ित परिवार से मिलने सपा का प्रतिनिधिमंडल पहुंचा था, जिस दौरान ग्रामीणों और सपाजनों के बीच पथराव हो गया था, जिसमें पूर्व मंत्री राम आसरे विश्वकर्मा समेत कई लोग चोटिल हुए थे। पुलिस ने सदर विधायक जैकिशन साहू, जंगीपुर विधायक विरेंद्र यादव, सपा जिलाध्यक्ष गोपाल यादव समेत 46 नामजद और करीब 200 अज्ञात लोगों पर केस दर्ज किया है। मामले में अब तक दस लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।
वहीं, मृत किशोरी के परिजनों से शुक्रवार देर रात एडीजी पीयूष मोर्डिया व डीआईजी वैभव कृष्ण ने मुलाकात की, जबकि शनिवार को कमिश्नर एस. राजलिंगम और जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला भी गांव पहुंचे। अधिकारियों ने परिजनों से घटनाक्रम की जानकारी ली और अब तक की पुलिस कार्रवाई पर चर्चा की। साथ ही पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने का भरोसा दिया। परिजनों ने पुलिस की कार्रवाई पर संतोष जताते हुए मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराने और कड़ी सजा दिलाने की मांग की। इस घटना ने राज्य में कानून व्यवस्था और सामाजिक न्याय पर बहस छेड़ दी है, जिससे आम जनता में भी चिंता का माहौल है।
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